US-Iran Second Round Talks in Pakistan Today, Key Leaders to Skip Meeting
तेहरान: Iran ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित शांति वार्ता को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। ईरान ने साफ कहा है कि वह इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत में तभी शामिल होगा, जब United States अपनी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करेगा। ईरान ने इस नाकाबंदी को युद्धविराम का उल्लंघन और “जंग जैसी कार्रवाई” बताया है।
इस बीच, Donald Trump ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल के पाकिस्तान न पहुंचने पर एकतरफा तौर पर सीजफायर बढ़ाने का ऐलान कर दिया। यह फैसला उस समय लिया गया जब 8 अप्रैल को घोषित दो हफ्ते का युद्धविराम समाप्त होने वाला था।
बातचीत के लिए ईरान की शर्त
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत Amir Saeid Iravani ने कहा कि जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नाकाबंदी खत्म नहीं करता, तब तक बातचीत संभव नहीं है। उनका कहना है कि पहले अमेरिका को “सीजफायर उल्लंघन” रोकना होगा, तभी किसी नए दौर की वार्ता शुरू हो सकती है।
ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अगर अमेरिका राजनीतिक समाधान चाहता है तो ईरान तैयार है, लेकिन अगर वह युद्ध का रास्ता चुनता है, तो ईरान भी पूरी तरह तैयार है।
ईरान का सख्त संदेश
ईरानी मीडिया से बातचीत में इरावानी ने कहा कि जैसे ही अमेरिका नाकाबंदी हटाएगा, बातचीत का अगला दौर Islamabad में हो सकता है।
वहीं, ईरानी संसद से जुड़े वरिष्ठ नेता Mohammad Bagher Ghalibaf के सलाहकार महदी मोहम्मदी ने अमेरिका पर तंज कसते हुए कहा कि सीजफायर बढ़ाने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि “हारने वाला पक्ष अपनी शर्तें नहीं थोप सकता।” उन्होंने इसे अमेरिका की रणनीति बताते हुए कहा कि यह अचानक हमला करने की तैयारी भी हो सकती है।
इस्लामाबाद में वार्ता टली
आज Pakistan की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता प्रस्तावित थी, लेकिन ईरान की ओर से स्पष्ट जवाब न मिलने के कारण अमेरिका ने अपने प्रतिनिधियों को भेजने से इनकार कर दिया।
इस वार्ता में अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance, विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner के शामिल होने की संभावना थी।
ईरान ने बातचीत में शामिल न होने के पीछे अमेरिका की “अत्यधिक मांगें, अवास्तविक शर्तें और बार-बार बदलते रुख” को जिम्मेदार ठहराया है।
कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता नजर आ रहा है। दोनों देशों के बीच बातचीत की राह फिलहाल शर्तों और आरोप-प्रत्यारोप के बीच फंसी हुई है।
