India-Norway Sign Major Deals from Arctic to Space
ओस्लो: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नॉर्वे दौरा भारत के लिए कई बड़े रणनीतिक और तकनीकी समझौते लेकर आया है। पीएम मोदी 43 वर्षों में नॉर्वे का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने हैं। इस दौरान भारत और नॉर्वे के बीच अंतरिक्ष, ग्रीन एनर्जी, आर्कटिक रिसर्च, स्वास्थ्य, डिजिटल टेक्नोलॉजी और समुद्री सुरक्षा समेत कई क्षेत्रों में अहम समझौते हुए।
दोनों देशों ने अपने रिश्तों को “ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप” तक बढ़ाने पर सहमति जताई है। इसका मकसद क्लाइमेट एक्शन, ग्रीन इंडस्ट्री, सर्कुलर इकॉनमी और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है। इससे नॉर्वे की आधुनिक तकनीक और भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को साथ मिलकर काम करने का मौका मिलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्वे ने एक त्रिपक्षीय विकास सहयोग समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इसके जरिए भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर तकनीक को ग्लोबल साउथ देशों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
पहलगाम आतंकी हमले का भी किया जिक्र
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले साल उनका नॉर्वे दौरा पहलगाम आतंकी हमले के कारण टालना पड़ा था। उन्होंने कहा कि उस मुश्किल समय में नॉर्वे ने आतंकवाद के खिलाफ भारत का खुलकर समर्थन किया और सच्चे मित्र की भूमिका निभाई।
इंडो-पैसिफिक और समुद्री सुरक्षा पर फोकस
नॉर्वे अब भारत के “इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव” का हिस्सा बनेगा। इससे समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकॉनमी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग मजबूत होगा।
इसके अलावा भारत की “नॉर शिपिंग 2027” में भागीदारी से ग्रीन शिपिंग, पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और शिपबिल्डिंग जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं खुलेंगी।
डिजिटल इंडिया और हेल्थ सेक्टर को मिलेगा फायदा
दोनों देशों के बीच डिजिटल डेवलपमेंट पार्टनरशिप पर भी समझौता हुआ है। इसके तहत डिजिटल पब्लिक गुड्स, ओपन डिजिटल इकोसिस्टम और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे डिजिटल इंडिया मिशन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी।
स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए समझौते के तहत मेडिकल रिसर्च, ज्ञान साझा करने और संयुक्त प्रोजेक्ट्स पर काम किया जाएगा।
आर्कटिक, ऊर्जा और रिसर्च में सहयोग
भारत और नॉर्वे ने ओशन एनर्जी, ऑफशोर विंड एनर्जी और वेव एनर्जी टेक्नोलॉजी में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। दोनों देश आर्कटिक और गहरे समुद्री क्षेत्रों में रिसर्च को आगे बढ़ाएंगे।
इसके अलावा CSIR और नॉर्वे की रिसर्च संस्थाओं के बीच कार्बन कैप्चर, बायो-बेस्ड मटेरियल और सस्टेनेबल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स पर संयुक्त रिसर्च के लिए समझौते हुए हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर और साइंस सेक्टर में भी बढ़ेगा सहयोग
सुरंग निर्माण, सड़क सुरक्षा और जियोटेक्निकल प्रोजेक्ट्स को लेकर भी दोनों देशों के बीच समझौते हुए हैं। इससे भारत में हाईवे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को तकनीकी सहायता मिलेगी।
साथ ही छात्रों, वैज्ञानिकों और रिसर्चरों के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी और मजबूत होगी।
