India Condemns Drone Attack on UAE Nuclear Plant
नई दिल्ली/अबू धाबी: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट के पास हुए ड्रोन हमले के बाद भारत ने गहरी चिंता जताई है। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना को “खतरनाक उकसावा” बताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के रास्ते पर लौटने की अपील की है।
विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, “UAE के बराकाह परमाणु संयंत्र को निशाना बनाकर किया गया हमला बेहद चिंताजनक है। इस तरह की कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है और यह क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाला कदम है। भारत तुरंत शांति, संवाद और कूटनीतिक समाधान की अपील करता है।”
ड्रोन हमले से प्लांट के पास लगी आग
UAE अधिकारियों के अनुसार पश्चिमी सीमा की ओर से तीन ड्रोन देश में दाखिल हुए थे। इनमें से एक ड्रोन बराकाह परमाणु संयंत्र के अंदरूनी सुरक्षा क्षेत्र से टकरा गया, जबकि दो अन्य ड्रोन को सुरक्षा बलों ने रास्ते में ही मार गिराया।
हमले के बाद संयंत्र के पास आग लग गई, हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी के घायल होने या रेडिएशन स्तर में बदलाव की कोई खबर नहीं है।
UAE ने बताया आतंकी हमला
UAE के विदेश मंत्रालय ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे देश की सुरक्षा और संप्रभुता पर हमला बताया। मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के हमले किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
हमले के बाद UAE के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने कतर, सऊदी अरब, जॉर्डन, कुवैत, मिस्र, मोरक्को और बहरीन के विदेश मंत्रियों से बातचीत की। सभी देशों ने हमले की निंदा करते हुए UAE के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया।
मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब मध्य पूर्व में युद्धविराम बेहद कमजोर स्थिति में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ सकता है और क्षेत्र में स्थायी शांति की संभावनाएं फिलहाल कमजोर नजर आ रही हैं।
UAE के राष्ट्रपति सलाहकार अनवर गरगाश ने सोशल मीडिया पर कहा कि परमाणु संयंत्र को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है और इससे नागरिकों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती थी।
अरब दुनिया का इकलौता परमाणु प्लांट
करीब 20 अरब डॉलर की लागत से बना बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट दक्षिण कोरिया की मदद से तैयार किया गया था और 2020 में चालू हुआ था। यह अरब दुनिया का इकलौता परमाणु ऊर्जा संयंत्र है और UAE की लगभग 25 प्रतिशत बिजली जरूरतों को पूरा करता है।
इससे पहले 2017 में यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इस प्लांट को निशाना बनाने का दावा किया था, हालांकि उस समय UAE ने इसे खारिज कर दिया था।
