अंकारा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले सप्ताह तुर्की में आयोजित होने वाले नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचेंगे। इस दौरान उनकी तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन के साथ द्विपक्षीय बैठक होने की भी संभावना है। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में रक्षा सहयोग और लड़ाकू विमान कार्यक्रम से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की तुर्की यात्रा से अंकारा को अमेरिकी F110 फाइटर जेट इंजनों की आपूर्ति का रास्ता साफ हो सकता है। हालांकि, लंबे समय से विवादों में घिरे F-35 लड़ाकू विमान कार्यक्रम में तुर्की की दोबारा वापसी को लेकर फिलहाल किसी बड़ी प्रगति की उम्मीद नहीं जताई जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि वह तुर्की की रक्षा जरूरतों को लेकर सकारात्मक रुख अपना सकते हैं। ऐसे में तुर्की को F110 जेट इंजन मिलने की संभावना बढ़ी है, जिनका इस्तेमाल वह अपने स्वदेशी KAAN स्टील्थ फाइटर जेट कार्यक्रम में करना चाहता है।
इस्तांबुल स्थित थिंक टैंक EDAM के निदेशक सिनान उल्गेन के अनुसार, तुर्की को GE F110 इंजन की आपूर्ति के लिए मंजूरी मिलने की संभावना है। उन्होंने कहा कि पहले इस प्रक्रिया में कुछ बाधाएं थीं, लेकिन अब उन्हें दूर किया जा रहा है। तुर्की पहले ही KAAN के कुछ प्रोटोटाइप तैयार कर चुका है, जिनकी परीक्षण उड़ानें F110 इंजन के साथ हो चुकी हैं। अब बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए इंजन की आपूर्ति का इंतजार है।
KAAN एक ट्विन-इंजन वाला पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे टर्किश एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (TAI) विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य तुर्की वायु सेना के पुराने F-16 लड़ाकू विमानों की जगह लेना है। तुर्की की कोशिश अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों की श्रेणी में शामिल होकर उन्नत पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने वाले देशों के समूह में अपनी जगह बनाने की है।
7 और 8 जुलाई को होने वाले NATO शिखर सम्मेलन में 32 सदस्य देशों के नेता हिस्सा लेंगे। सम्मेलन के दौरान सुरक्षा, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय चुनौतियों के साथ-साथ कई द्विपक्षीय बैठकों पर भी दुनिया की नजर रहेगी।
