हरदोई। कोथावां क्षेत्र के ग्राम पुरवा बाजीराव (मजरा जरौआ) निवासी सीआरपीएफ की 112वीं बटालियन के जवान विनीत कुमार सिंह सिकरवार (37) का शुक्रवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके बड़े भाई अनिल सिंह ने मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए।
विनीत सिंह की 5 अगस्त को मणिपुर के मोतबंग स्थित सीआरपीएफ मुख्यालय में गोली लगने से मृत्यु हो गई थी। सीआरपीएफ ने प्रारंभिक जानकारी में इसे निजी हथियार से आत्महत्या का मामला बताया है। वहीं, परिजनों ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मृतक की पत्नी नेहा सिंह का आरोप है कि विनीत पिछले तीन-चार दिनों से बुखार और शरीर दर्द से पीड़ित थे, इसके बावजूद उनसे लगातार ड्यूटी कराई जा रही थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि विनीत के सीने में तीन गोलियां लगी थीं और घटना की विस्तृत जांच कराई जानी चाहिए।
पार्थिव शरीर हरदोई लाए जाने के दौरान लखनऊ के बुद्धेश्वर चौराहे पर परिजनों ने शव वाहन रोककर प्रदर्शन किया। उन्होंने दोबारा पोस्टमार्टम, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस अधिकारियों के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।
शुक्रवार सुबह गांव पहुंचते ही शोक की लहर दौड़ गई। हत्याहरण तीर्थ के निकट पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सीआरपीएफ अधिकारियों ने मृतक की पत्नी को अंतिम संस्कार के लिए एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की।
विनीत सिंह वर्ष 2009 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। हाल ही में उनका तबादला जम्मू-कश्मीर से मणिपुर हुआ था। उनके परिवार में पत्नी, 12 वर्षीय पुत्र, पिता और दो बड़े भाई हैं।
फिलहाल सीआरपीएफ ने घटना को आत्महत्या बताया है, जबकि परिजनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। मामले की वास्तविक परिस्थितियों का पता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
