Assam Passes UCC Bill 2026, Becomes Third State To Implement Uniform Civil Code
गुवाहाटी। असम विधानसभा ने सोमवार को समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद देश का तीसरा राज्य बन गया है, जहां यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का रास्ता साफ हो गया है।
विधानसभा में लंबी चर्चा और विपक्ष के विरोध के बीच यह विधेयक ध्वनिमत से पारित किया गया। 126 सदस्यीय सदन में एनडीए के 102 विधायकों का समर्थन बिल के पक्ष में रहा। विपक्षी दलों ने विधेयक को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया।
UCC लागू होने के बाद क्या बदलेगा?
नए कानून के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी।
विधेयक के प्रमुख प्रावधानों में बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल है। नियमों का उल्लंघन करने पर सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य होगा। निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर तीन महीने तक की सजा हो सकती है।
कानून के तहत पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष तय की गई है। साथ ही विवाह के 60 दिनों के भीतर उसका पंजीकरण कराना भी अनिवार्य होगा।
बेटियों को मिलेगा बराबरी का अधिकार
विधेयक में महिलाओं के अधिकारों को विशेष महत्व दिया गया है। इसके तहत बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार मिलेगा। सरकार का दावा है कि यह कदम महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से अधिक सशक्त बनाएगा।
अनुसूचित जनजातियों को छूट
विधेयक में अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों को उनकी सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान को ध्यान में रखते हुए कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने क्या कहा?
असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने इसे राज्य सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह महिलाओं के सम्मान और समान अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में महिलाओं की गरिमा और अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता।
UCC बिल के पारित होने के बाद असम की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। सरकार इसे सामाजिक सुधार और लैंगिक समानता की दिशा में अहम कदम बता रही है, जबकि विपक्ष ने इसके कुछ प्रावधानों पर चिंता जताई है।
