Trump Warns Iran Again Amid Rising Middle East Tensions
तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं, जिसके बाद मध्य पूर्व में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं।
हालांकि ट्रंप ने फिलहाल कतर, सऊदी अरब और UAE के अनुरोध पर नए हमलों को रोक दिया है, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ तो हालात जल्द बदल सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान अब पहले से ज्यादा समझौता करना चाहता है क्योंकि उसे पता है कि आगे क्या होने वाला है।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की ओर से भेजे गए नए प्रस्ताव को अमेरिका ने पर्याप्त नहीं माना है। वहीं ट्रंप ने यह भी कहा कि वह तेहरान को किसी तरह की रियायत देने के पक्ष में नहीं हैं।
ईरान युद्ध की तैयारी में जुटा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोबारा युद्ध शुरू होता है तो यह पहले से कहीं ज्यादा तेज और खतरनाक हो सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान अब लंबी लड़ाई के बजाय “शॉर्ट लेकिन हाई इंटेंसिटी वॉर” की तैयारी कर रहा है।
ईरानी सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि तेहरान इस बार रोजाना दर्जनों या सैकड़ों मिसाइलें दाग सकता है। इसके निशाने पर इजराइल के साथ-साथ खाड़ी देशों के अहम ठिकाने और ऊर्जा केंद्र हो सकते हैं।
तेल ठिकानों और बंदरगाहों पर खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक ईरान अगर सऊदी अरब, UAE या कुवैत के तेल ठिकानों, रिफाइनरियों और बंदरगाहों को निशाना बनाता है तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
ईरान पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य पर मजबूत पकड़ रखता है, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई गुजरती है। इसके अलावा बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर भी खतरा बढ़ गया है, जहां हूती विद्रोही सक्रिय हैं।
अगर इन समुद्री रास्तों पर संकट गहराता है तो वैश्विक व्यापार और तेल बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
ईरान में आम लोगों को हथियार ट्रेनिंग
रिपोर्ट्स के मुताबिक तेहरान में सार्वजनिक जगहों पर हथियार प्रशिक्षण केंद्र दिखाई देने लगे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और वीडियो में लोगों को बेसिक हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान संभावित अमेरिकी जमीनी हमले की आशंका को देखते हुए आम नागरिकों को भी तैयार कर रहा है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ सकती है अस्थिरता
विश्लेषकों का कहना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच हालात और बिगड़े तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमतों, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
