Pune Beautician Emerges as Key Link in NEET Paper Leak Case
नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI जांच के दौरान चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक पुणे की 46 वर्षीय ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी बनकर उभरी है। आरोप है कि वह छात्रों को ट्यूशन टीचर्स से जोड़ने के बहाने पेपर लीक रैकेट में शामिल हुई और मोटी रकम लेकर प्रश्नपत्र उपलब्ध करवाने लगी।
CBI ने मनीषा वाघमारे को 14 मई को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे और रिटायर्ड शिक्षक पी.वी. कुलकर्णी को 10 दिन की CBI कस्टडी में भेजा गया। वहीं रविवार को दिल्ली की अदालत ने मामले की एक और आरोपी मनीषा गुरुनाथ मंधारे को 14 दिन की CBI हिरासत में भेज दिया।
जांच एजेंसी के अनुसार मनीषा मंधारे NTA की प्रश्नपत्र तैयार करने वाली विशेषज्ञ समिति में शामिल थीं और उन्हें बॉटनी व जूलॉजी के फाइनल प्रश्नपत्रों तक सीधी पहुंच थी। CBI का आरोप है कि उन्होंने मोटी रकम लेकर चुनिंदा छात्रों को पेपर लीक किया।
10 लाख रुपये प्रति छात्र का सौदा
CBI सूत्रों के मुताबिक मनीषा वाघमारे को जानकारी मिली थी कि मंधारे प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल हैं। इसके बाद दोनों ने मिलकर पेपर लीक की साजिश रची और रिटायर्ड शिक्षक पी.वी. कुलकर्णी को भी इसमें शामिल कर लिया।
जांच में सामने आया है कि वाघमारे छात्रों से करीब 10 लाख रुपये प्रति छात्र लेती थी। इस रकम में से 2.5 से 3 लाख रुपये आरोपी आपस में बांटने वाले थे। वाघमारे ने कथित तौर पर 4 से 5 छात्रों की व्यवस्था भी की थी।
नासिक से गुरुग्राम और जयपुर तक फैला नेटवर्क
CBI के मुताबिक वाघमारे ने अपने पुराने दोस्त धनंजय लोखंडे को इस योजना की जानकारी दी। इसके बाद लोखंडे ने नासिक में काउंसलिंग का काम करने वाले शुभम खैरनार से संपर्क किया।
जांच एजेंसी का दावा है कि शुभम खैरनार को लीक पेपर की PDF फाइलें दी गईं, जिन्हें बाद में गुरुग्राम निवासी यश यादव और जयपुर के कुछ लोगों तक पहुंचाया गया। यश यादव और शुभम खैरनार को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
CBI बोली- अभी कई आरोपी बाकी
CBI ने अदालत में कहा कि यह एक बड़ा संगठित गिरोह है और मामले में अभी कई लोगों की पहचान और गिरफ्तारी बाकी है। एजेंसी का कहना है कि जांच शुरुआती और बेहद महत्वपूर्ण चरण में है, इसलिए आरोपियों से लगातार पूछताछ जरूरी है।
वहीं आरोपी मनीषा मंधारे के वकील ने अदालत में कहा कि वह 57 वर्षीय लेक्चरर हैं और जांच में पूरा सहयोग कर रही हैं, इसलिए लंबी पुलिस हिरासत की जरूरत नहीं है। हालांकि अदालत ने CBI की दलीलों को मानते हुए उन्हें 14 दिन की कस्टडी में भेज दिया।
