Netherlands to Return Chola-Era Copper Plates to India
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारत को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है। नीदरलैंड सरकार 11वीं सदी के चोल साम्राज्य की ऐतिहासिक ‘लीडेन तांबे की प्लेटें’ भारत को वापस सौंपेगी। इन प्लेटों को ‘अनैमंगलम कॉपर प्लेट्स’ के नाम से भी जाना जाता है।
करीब 300 साल से ज्यादा समय से ये ऐतिहासिक धरोहर नीदरलैंड की लीडेन यूनिवर्सिटी में सुरक्षित रखी गई थी। अब इन्हें भारत लौटाया जा रहा है, जिसे देश की सांस्कृतिक विरासत की बड़ी वापसी माना जा रहा है।
21 तांबे की प्लेटों से बना यह ऐतिहासिक संग्रह लगभग 30 किलो वजनी है। इन प्लेटों पर चोल सम्राट राजाराजा चोल प्रथम और उनके बेटे राजेंद्र चोल प्रथम के शासनकाल से जुड़े महत्वपूर्ण लेख दर्ज हैं। प्लेटों पर संस्कृत और तमिल दोनों भाषाओं में शिलालेख मौजूद हैं।
इतिहासकारों के अनुसार तमिल भाषा में लिखे हिस्से में राजाराजा चोल द्वारा नागपट्टिनम स्थित एक बौद्ध मठ को दिए गए दान का उल्लेख मिलता है। यह मठ श्रीविजय साम्राज्य के एक मलय राजा द्वारा बनवाया गया था। वहीं संस्कृत भाग में चोल वंश की वंशावली और राजसत्ता का वर्णन किया गया है।
चोल साम्राज्य दक्षिण भारत के सबसे शक्तिशाली राजवंशों में गिना जाता है। उस दौर में चोल शासकों ने दक्षिण भारत, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया तक अपना प्रभाव स्थापित किया था। तंजावुर का प्रसिद्ध बृहदेश्वर मंदिर भी उनकी महान स्थापत्य कला का उदाहरण माना जाता है।
बताया जाता है कि करीब 1700 ईस्वी में डच मिशनरी फ्लोरेंटियस कैंपर इन प्लेटों को भारत से लेकर गया था। उस समय नागपट्टिनम क्षेत्र पर डच ईस्ट इंडिया कंपनी का नियंत्रण था। बाद में ये प्लेटें लीडेन यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में पहुंच गईं।
अब तीन सदियों बाद इन ऐतिहासिक धरोहरों की भारत वापसी को सांस्कृतिक विरासत संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
