तेहरान: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग का संचालन अब कभी भी युद्ध-पूर्व स्थिति में नहीं लौटेगा। ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने स्विटजरलैंड में हुई वार्ता से लौटने के बाद यह घोषणा की।
गालिबाफ ने कहा कि युद्ध की शुरुआत से ही ईरान का रुख स्पष्ट था कि होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रबंधन भविष्य में नई परिस्थितियों और सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुसार किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस अहम जलमार्ग पर नियंत्रण और प्रशासन अब पहले जैसा नहीं रहेगा।
ईरानी संसद अध्यक्ष ने वार्ताकारों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने सैन्य टकराव के बजाय कूटनीतिक प्रयासों के जरिए अमेरिकी नाकेबंदी को समाप्त कराने में सफलता हासिल की। उनके अनुसार, यदि इस मुद्दे का समाधान सैन्य कार्रवाई से किया जाता, तो क्षेत्र में व्यापक युद्ध और भारी नुकसान की आशंका थी, लेकिन बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित किया गया।
गालिबाफ ने कहा, “ईरान ने कभी अमेरिका पर भरोसा नहीं किया है और न ही भविष्य में आंख मूंदकर भरोसा करेगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि तेहरान आगे भी वॉशिंगटन के साथ किसी भी समझौते या लेन-देन में पूरी सतर्कता बरतेगा।
इस बीच, दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने और भविष्य में किसी भी संभावित संकट से बचने के लिए एक विशेष हॉटलाइन तंत्र स्थापित करने पर भी सहमति बनी है। माना जा रहा है कि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री व्यापार से जुड़े मामलों में तत्काल संवाद संभव हो सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का यह रुख वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि दुनिया के तेल और गैस निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
