नई दिल्ली। यमन के पास लाल सागर में भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाज ‘एमएसवी फ़ैज़े नूरे ओलिया’ पर हुए हमले के बाद जहाज समुद्र में डूब गया। घटना के समय जहाज पर मौजूद 13 भारतीय चालक दल के सदस्य और एक विदेशी नागरिक को यमनी तटरक्षक बल ने सुरक्षित बचाकर मोखा बंदरगाह पहुंचाया।
घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे एक निहत्थे नागरिक व्यापारिक जहाज पर बिना उकसावे किया गया हमला बताया। मंत्रालय ने लाल सागर और आसपास के समुद्री मार्गों पर व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को निर्बाध बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
हालांकि, विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में किसी भी देश या संगठन का नाम नहीं लिया, जिससे हमले के जिम्मेदार पक्ष को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
हाल के वर्षों में लाल सागर, होर्मुज जलडमरूमध्य और काला सागर जैसे रणनीतिक समुद्री क्षेत्रों में व्यापारिक जहाजों पर कई हमले हुए हैं। इन घटनाओं में कई भारतीय नाविक भी प्रभावित हुए हैं। विभिन्न मामलों में भारत ने संबंधित देशों के राजनयिकों को तलब कर अपनी चिंता और विरोध दर्ज कराया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में भारत अक्सर आधिकारिक जांच और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर ही किसी पक्ष का नाम लेता है। बिना पर्याप्त पुष्टि के किसी देश या संगठन को जिम्मेदार ठहराने से कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
फिलहाल इस हमले की जांच जारी है और हमले के लिए जिम्मेदार पक्ष की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। भारत ने समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की आवश्यकता दोहराई है।
