Consumers Doubled, Infrastructure Outdated: Why Uttar Pradesh Is Facing a Power Crisis
उत्तर प्रदेश: में भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। गांवों से लेकर शहरों और राजधानी लखनऊ तक लोग बिजली कटौती से परेशान हैं। बढ़ती गर्मी और लगातार हो रही कटौती ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस मुद्दे पर अब सियासत भी तेज हो गई है।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रदेश में बिजली संकट को “महाआपदा” बताया है। वहीं राज्य सरकार का कहना है कि बिजली की मांग और उपभोक्ताओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।
सरकार का दावा: मांग और उपभोक्ता दोनों बढ़े
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री के मुताबिक, 2012-17 के दौरान उत्तर प्रदेश में बिजली की औसत मांग करीब 13,000 मेगावाट थी, जबकि वर्तमान में यह बढ़कर 30,000 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। यानी मांग में करीब ढाई गुना बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने बताया कि साल 2017 में राज्य में 1.80 करोड़ बिजली उपभोक्ता थे, जो अब बढ़कर 3.70 करोड़ हो चुके हैं। इसके साथ ही बिजली उत्पादन क्षमता में भी इजाफा हुआ है। 2017 में प्रदेश का तापीय बिजली उत्पादन 5,160 मेगावाट था, जो अब बढ़कर 9,120 मेगावाट तक पहुंच गया है।
सरकार का दावा है कि बीते कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश देश में सबसे ज्यादा बिजली सप्लाई करने वाले राज्यों में शामिल हुआ है। हालांकि इसके बावजूद लोगों को कटौती का सामना करना पड़ रहा है।
आखिर क्यों कट रही है बिजली?
बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार, संकट की सबसे बड़ी वजह बिजली वितरण व्यवस्था यानी डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम की कमजोरी है। बिजली उत्पादन पर्याप्त होने के बावजूद पुराने ट्रांसफार्मर, जर्जर तार, ओवरलोडेड सेकेंड्री सिस्टम और तकनीकी खराबियां सप्लाई व्यवस्था पर भारी पड़ रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले 9-10 वर्षों में उपभोक्ता और बिजली लोड लगभग दोगुना हो गया, लेकिन वितरण का इंफ्रास्ट्रक्चर उसी पुराने स्तर पर बना रहा। ऐसे में बढ़ता लोड सिस्टम झेल नहीं पा रहा और जगह-जगह फॉल्ट हो रहे हैं।
योजनाएं बनीं, लेकिन जमीनी काम नहीं
बिजली निगम के एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए कई योजनाएं तो बनाई गईं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं हुआ।
उन्होंने आरोप लगाया कि तकनीकी समझ रखने वाले विशेषज्ञों की बजाय प्रशासनिक अधिकारियों पर ज्यादा निर्भरता रही। साथ ही लाइनमैन और फील्ड स्टाफ की भारी कमी ने भी हालात बिगाड़ दिए।
संविदा कर्मचारियों की कमी बनी बड़ी समस्या
जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने करीब 30 हजार संविदा कर्मचारियों को हटा दिया है। ये कर्मचारी ट्रांसफार्मर रिपेयर, केबल फॉल्ट और लाइन मरम्मत जैसे काम संभालते थे।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्टाफ की कमी के कारण खराब ट्रांसफार्मर और केबल समय पर नहीं बदले जा पा रहे हैं। नतीजतन, लोड बढ़ते ही सिस्टम जवाब दे रहा है और बिजली कटौती बढ़ रही है।
गर्मी में रिकॉर्ड बिजली मांग
भीषण गर्मी के चलते यूपी में बिजली की मांग 30 हजार मेगावाट के पार पहुंच चुकी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पीक आवर्स में बिजली की भारी कमी दर्ज की गई।
स्थिति संभालने के लिए सरकार बिजली एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीद रही है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ बिजली खरीदना काफी नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती उसे सुरक्षित तरीके से घरों तक पहुंचाना है।
ट्रांसमिशन सिस्टम भी दबाव में
जानकारों के मुताबिक, राज्य की पावर ट्रांसमिशन क्षमता करीब 31,500 मेगावाट है। अगर इससे ज्यादा लोड दिया जाए तो कई उपकेंद्र ट्रिप कर सकते हैं। यही वजह है कि सरकार चाहकर भी जरूरत के मुताबिक पूरी बिजली सप्लाई नहीं दे पा रही।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस समय देशभर में बिजली की मांग काफी ज्यादा है, इसलिए निजी कंपनियों से अतिरिक्त बिजली खरीदना भी आसान नहीं है।
लोगों की बढ़ती मुश्किलें
लगातार कटौती के कारण लोगों को गर्मी में भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। खासतौर पर छोटे शहरों और अनियोजित कॉलोनियों में हालात ज्यादा खराब बताए जा रहे हैं, जहां पुराना इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ते लोड को संभाल नहीं पा रहा।
