आज हम आपको मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले की मंदसौर तहसील के ग्राम घटावदा की एक ऐसी तस्वीर दिखा रहे हैं, जो प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
यह है ग्राम घटावदा का आंगनवाड़ी केंद्र, जहां प्रतिदिन छोटे-छोटे मासूम बच्चे बैठकर भोजन करते हैं और शिक्षा प्राप्त करते हैं। लेकिन जिस भवन में ये बच्चे बैठते हैं, उसकी छत जर्जर और क्षतिग्रस्त बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि छत की स्थिति ऐसी है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार इस समस्या की जानकारी करीब एक वर्ष पहले संबंधित अधिकारियों को दी गई थी।
इसके बावजूद अब तक भवन की मरम्मत या बच्चों के लिए वैकल्पिक सुरक्षित व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में हर दिन बच्चों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा खतरे में बनी हुई है।

सोचिए, जिन मासूम बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा और पोषण मिलना चाहिए, वे एक ऐसे भवन में बैठने को मजबूर हैं जिसकी छत को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में कोई अप्रिय घटना हो सकती है।
हाल ही में राजस्थान में एक सरकारी विद्यालय में भवन से जुड़ी दुखद घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था, जिसमें कई बच्चों और एक शिक्षक की जान चली गई थी।
ऐसी घटनाएं यह याद दिलाती हैं कि जर्जर सरकारी भवनों की समय रहते जांच और मरम्मत कितनी आवश्यक है। इसलिए घटावदा की इस समस्या को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने से पहले आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
ग्रामीणों की मांग है कि जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा संबंधित अधिकारी तत्काल मौके का निरीक्षण करें, भवन की तकनीकी जांच कराएं और यदि भवन असुरक्षित पाया जाता है तो बच्चों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
हमारा उद्देश्य केवल समस्या को उजागर करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों तक लोगों की आवाज़ पहुंचाना है, ताकि समय रहते कार्रवाई हो और मासूम बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
