US-Iran Peace Talks Progress, Agreement Reached On Hormuz Strait And Nuclear Discussions
अमेरिका: और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव अब कम होता नजर आ रहा है। दोनों देशों के बीच 14 सूत्रीय शांति समझौते के मसौदे पर प्रारंभिक सहमति बनने की खबर सामने आई है। इस प्रस्तावित समझौते के तहत युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य आवाजाही बहाल करने और परमाणु मुद्दे पर विस्तृत वार्ता शुरू करने जैसे अहम बिंदु शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, समझौते को तीन चरणों में लागू करने की योजना बनाई गई है। पहले चरण में औपचारिक रूप से युद्ध समाप्ति की घोषणा होगी। दूसरे चरण में होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सामान्य की जाएगी, जबकि तीसरे चरण में व्यापक परमाणु और सुरक्षा समझौते पर बातचीत शुरू होगी। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच औपचारिक शांति वार्ता शुरू हो सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए हैं कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होने तक ईरान पर अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहेगी। ट्रंप ने कहा कि दोनों पक्षों को जल्दबाजी से बचना चाहिए और हर बिंदु पर सावधानी से आगे बढ़ना चाहिए।
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान के रिश्ते अब “ज्यादा पेशेवर और उत्पादक” हो सकते हैं। उन्होंने ईरान को अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने का सुझाव भी दिया। वहीं ईरानी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने मसौदे को मंजूरी दे दी है और अब इसे अंतिम स्वीकृति के लिए सुप्रीम लीडर के पास भेजा जाएगा।
हालांकि कुछ अहम मुद्दों पर मतभेद अभी भी बने हुए हैं। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान चाहता है कि भविष्य में अमेरिका किसी भी तरह की नई बाधा या प्रतिबंध न लगाए। ईरान के सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजाई ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रबंधन करना ईरान का वैध अधिकार है और इससे क्षेत्र में स्थिरता बढ़ेगी।
भारत ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्ग खुले रहना पूरी दुनिया के हित में है। भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी दावा किया कि ईरान के साथ बातचीत में “महत्वपूर्ण प्रगति” हुई है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि उनका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए है और तेहरान दुनिया को इस बारे में भरोसा दिलाने को तैयार है। वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि तनाव कम करना मौजूदा वार्ता का मुख्य उद्देश्य है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभावित समझौते में ईरान द्वारा परमाणु हथियार विकसित न करने की प्रतिबद्धता शामिल हो सकती है। साथ ही अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भविष्य को लेकर भी सहमति बनने के संकेत हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान सिद्धांततः अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम का एक हिस्सा कम संवर्धित करने और बाकी को किसी तीसरे देश, संभवतः रूस, को सौंपने पर विचार कर सकता है।
सूत्रों के अनुसार, समझौते के तहत अमेरिका ईरान के विदेशों में फ्रीज फंड जारी करने और तेल निर्यात पर कुछ प्रतिबंधों में राहत देने पर विचार कर सकता है। बदले में ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को सामान्य करेगा।
ऊर्जा बाजार इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है। ऐसे में तनाव कम होने की खबरों को वैश्विक बाजारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
