वॉशिंगटन। अमेरिका की सीनेट में गुरुवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की शक्तियों को सीमित करने से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव बेहद करीबी मुकाबले में खारिज हो गया। मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में 49 और विरोध में 50 वोट पड़े, जिसके चलते इसे मंजूरी नहीं मिल सकी।
रिपब्लिकन सीनेटर डेव मैकॉर्मिक इस मतदान में शामिल नहीं हुए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि वह वोटिंग में हिस्सा लेते तो परिणाम अलग हो सकता था।
क्या था प्रस्ताव?
प्रस्ताव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि राष्ट्रपति ईरान के खिलाफ किसी भी नई सैन्य कार्रवाई से पहले अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी लें। यदि यह प्रस्ताव पारित हो जाता, तो राष्ट्रपति अकेले सैन्य अभियान शुरू नहीं कर सकते थे और उन्हें संसद की स्वीकृति लेना अनिवार्य होता।
यह प्रस्ताव पहले सीनेट की विदेश मामलों की समिति में लंबित था। इसे पेश करने वाले सांसद चाहते थे कि इसे सीधे पूरी सीनेट में चर्चा और मतदान के लिए लाया जाए, लेकिन पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के कारण प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। अब इसे आगे बढ़ाने के लिए दोबारा प्रयास करना होगा।
ट्रंप के हमलों के बाद उठी थी मांग
हाल के हफ्तों में ईरान पर अमेरिकी हवाई हमलों के बाद विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों के साथ कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी मांग की थी कि युद्ध जैसे बड़े फैसले केवल कांग्रेस की मंजूरी से ही लिए जाएं। उनका तर्क था कि अमेरिकी संविधान के अनुसार युद्ध घोषित करने का अधिकार कांग्रेस के पास है, न कि केवल राष्ट्रपति के पास।
हालांकि, रिपब्लिकन बहुमत ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति जैसे संवेदनशील मामलों में राष्ट्रपति को तत्काल निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
उधर, ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने आरोप लगाया कि केश्म द्वीप (Qeshm Island) पर हुई अमेरिकी बमबारी में नागरिकों की मौत के लिए अमेरिका पूरी तरह जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि नागरिक ठिकानों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और अमेरिका को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
हालांकि, केश्म द्वीप पर कथित हमले में हताहतों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ईरानी मीडिया ने कई आम नागरिकों के मारे जाने का दावा किया है, जबकि स्वतंत्र स्रोतों से इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है।
