मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने एनालॉग पनीर के उत्पादन, वितरण और बिक्री पर एक वर्ष के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले के बाद राज्य के होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग सेवाएं और क्लाउड किचन अब एनालॉग पनीर का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। यह कदम उपभोक्ताओं के साथ कथित धोखाधड़ी और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए उठाया गया है।
एनालॉग पनीर एक कृत्रिम डेयरी विकल्प है, जिसे वनस्पति तेल (Vegetable Oil) और अन्य कृत्रिम सामग्री की मदद से तैयार किया जाता है। इसका रंग, बनावट और स्वाद काफी हद तक असली दूध से बने पनीर जैसा होता है, जिससे आम उपभोक्ता आसानी से भ्रमित हो सकते हैं।
ग्राहकों को बिना बताए परोसा जा रहा था
अब तक महाराष्ट्र में एनालॉग पनीर के उपयोग की अनुमति थी, लेकिन नियमों के मुताबिक होटल या फूड बिजनेस ऑपरेटर को ग्राहकों को स्पष्ट रूप से बताना जरूरी था कि परोसा जा रहा पनीर असली नहीं, बल्कि एनालॉग पनीर है।
हालांकि जांच में सामने आया कि कई छोटे-बड़े होटल, रेस्टोरेंट, क्लाउड किचन और कुछ बड़े ब्रांड भी ग्राहकों को बिना जानकारी दिए असली पनीर की जगह कम कीमत वाले एनालॉग पनीर का इस्तेमाल कर रहे थे।
लैब जांच में सामने आई गड़बड़ी
हाल ही में हुई लैब जांच में राज्यभर से लिए गए पनीर के 35 प्रतिशत से अधिक नमूने गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाए गए। जांच में इनमें वनस्पति वसा (Vegetable Fat) की मिलावट मिलने की बात सामने आई। इसके बाद खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई।
नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंडे ने 30 जुलाई 2026 को प्रतिबंध संबंधी आदेश जारी किया था। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले फूड बिजनेस ऑपरेटरों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
