Convict Sentenced to Death in 15-Year-Old Double Murder Case; Fined ₹6 Lakh
मुजफ्फरनगर। जनपद के चर्चित दोहरे हत्याकांड में करीब 15 वर्ष बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी को मृत्युदंड और 6 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह कार्रवाई मुजफ्फरनगर पुलिस के ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत प्रभावी विवेचना और अभियोजन की मजबूत पैरवी का परिणाम मानी जा रही है।
जानकारी के अनुसार 13 नवंबर 2011 को थाना चरथावल क्षेत्र के निवासी राजेंद्र पुत्र झंडू पाल ने पुलिस को सूचना दी थी कि उसके खेत में एक महिला और एक बच्चे के शव पड़े हुए हैं। सूचना मिलने पर थाना चरथावल पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। इस संबंध में थाना चरथावल पर हत्या जैसी 242/2011 धारा 302/201 गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
विवेचना के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए और अन्य जांच-पड़ताल की। जांच में रहीश उर्फ जहूर हसन पुत्र नत्थू बक्श निवासी ग्राम पराबाहुउद्दीनपुर, थाना बिशारतगंज, जनपद बरेली का नाम प्रकाश में आया। पुलिस ने 11 दिसंबर 2011 को आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। इसके बाद आवश्यक साक्ष्य संकलित करते हुए 19 जनवरी 2012 को आरोपी के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में ऑपरेशन कन्विक्शन के अंतर्गत इस मामले की लगातार मॉनिटरिंग की गई। पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अक्षय संजय महाडीक, पुलिस अधीक्षक अपराध इंदु सिद्धार्थ, क्षेत्राधिकारी सदर डॉ. रविशंकर तथा थाना प्रभारी चरथावल सत्यनारायण दहिया के नेतृत्व में मामले की प्रभावी पैरवी कराई गई। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी कुलदीप सिंह एवं कोर्ट पैरोकार हेड कांस्टेबल कुलदीप तोमर ने न्यायालय में मजबूत पक्ष रखा तथा सभी गवाहों को समय पर पेश कराया।
अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर एडीजे/एफटीसी कोर्ट संख्या-3 के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने आरोपी रहीश उर्फ जहूर हसन को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड तथा 6 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय के इस फैसले को पीड़ित पक्ष के लिए बड़ी न्यायिक सफलता माना जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन कन्विक्शन के माध्यम से गंभीर अपराधों में दोषियों को सजा दिलाने का अभियान लगातार जारी है। न्यायालय के फैसले के बाद आमजन ने पुलिस और अभियोजन की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कानून व्यवस्था पर अपना विश्वास और मजबूत होने की बात कही।
तो वहीं इस पूरे मामले में शासकीय अधिवक्ता राजीव कुमार ने बताया कि यह चरथावल थाना क्षेत्र का मामला है वर्ष 2011 में राजेश देवी अपने 6 वर्षीय बेटे हिमांशु को लेकर अपनी बेटी पूजा से मिलने रुड़की की ओर गई थी यह तथ्य सामने आया कि यह अभियुक्त रहीश से मिली थी अभियुक्त रहीश ने उसे एक के खेत में ले जाकर ईट से कुचलकर उसकी हत्या कर दी और जब उसका 6 वर्षीय पुत्र हिमांशु रोया चिल्लाया तो उसने उसकी भी बेरहमी से हत्या कर दी साक्ष्य संकलन के बाद आरोप पत्र माननीय न्यायालय में प्रेषित किया गया वर्तमान में यह मामला एफटीसी (FTC) थर्ड जिसके पीठासीन अधिकारी रवि दिवाकर जी है उनके न्यायालय में विचाराधीन था।
अभियोग द्वारा बहुत मजबूती से पैरवी करते हुए हमारे लोक अभियोजक कुलदीप कुमार द्वारा इसमें नौ गवाहों को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रेषित कराया सभी पुलिस प्रपत्रों को साबित कराया और माननीय न्यायालय ने आज इसमें अपना निर्णय सुनाया है इस मामले को रेयर ऑफ द रेयरेस्ट मानते हुए अभियुक्त रहीश को फांसी की सजा सुनाई है और उसे 6 लाख के अर्थ दंड से भी दंडित किया है इस प्रकार के मामले माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देशन में हमारे जिलाधिकारी हमारे एसपी साहब इनकी मॉनिटरिंग में रहते हुए हमारे अभियोग द्वारा मजबूती से पैरवी की जा रही हे और पिछले पांच सालों में यह फांसी की चौथी सजा है इन मामलों में हम फांसी की सजा दिलाने में कामयाब रहे
