बैतूल। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले ने 18 जून को एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण का साक्षी बना, जब देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पहली बार जिले का दौरा किया। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर पूरे जिले में उत्साह, उल्लास और गर्व का माहौल देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोगों ने कार्यक्रम में शामिल होकर इस ऐतिहासिक अवसर का हिस्सा बनने का सौभाग्य प्राप्त किया।
हालांकि राष्ट्रपति के इस ऐतिहासिक दौरे की चमक के बीच आशा और ऊषा कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी खुलकर सामने आई। जिला मुख्यालय पर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कई दिनों से धरना दे रही आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के दौरे के दौरान भी अपनी समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया।
प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें पूर्व में कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन उनकी मांगों के समाधान के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होने के बावजूद उन्हें पर्याप्त मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान उन्हें अपनी समस्याएं रखने का अवसर मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इससे नाराज महिलाओं ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करते हुए सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा सकते हैं।
फिलहाल आशा और ऊषा कार्यकर्ताओं का धरना जारी है। वहीं प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जिले में राष्ट्रपति के ऐतिहासिक दौरे की चर्चा के साथ-साथ कार्यकर्ताओं के आंदोलन की भी व्यापक चर्चा हो रही है।
अब सभी की निगाहें प्रशासन और सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि लंबे समय से लंबित मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है।
