A Canopy Collapses in SECL Kusmunda Vikas Nagar Colony
एसईसीएल कुसमुंडा विकास नगर कॉलोनी में छज्जा गिरा, खदान कर्मियों का जीवन खतरे में,बाल बाल बचा परिवार,जर्जर मकान को लेकर एसईसीएल कर्मी डर का साये में
कोरबा जिले के एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र स्थित विकास नगर कॉलोनी में खदान कर्मियों के आवासों की जर्जर हालत एक बार फिर सामने आई है। एमडी 106 नंबर क्वार्टर का छज्जा मंगलवार को अचानक मिट्टी के ढेर की तरह ढह गया। गनीमत रही कि उसमें रह रहा परिवार बाल-बाल बच गया, लेकिन इस घटना ने कॉलोनी में रहने वाले सैकड़ों परिवारों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय रहवासियों के अनुसार विकास नगर कॉलोनी की स्थिति बेहद बदतर हो चुकी है। यहां अक्सर किसी न किसी क्वार्टर का कोई हिस्सा टूटकर गिरता रहता है। छतों से प्लास्टर गिरना, दीवारों में दरारें आना और अब छज्जों का ढहना आम बात हो गई है। कॉलोनी के लोगों का कहना है कि लगभग सभी आवास जीर्ण शीर्ण अवस्था में हैं और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
एसईसीएल कर्मी देवा कुमार राउत ने बताया कि आवासों की बदहाली की जानकारी एसईसीएल प्रबंधन को कई बार लिखित में दी जा चुकी है। मरम्मत के लिए आवेदन देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोग आरोप लगा रहे हैं कि प्रबंधन जानबूझकर लापरवाही बरत रहा है। ऐसा लगता है कि प्रबंधन किसी बड़ी अनहोनी की प्रतीक्षा कर रहा है, जिसके बाद ही शायद उनकी नींद टूटे।
आज की घटना के बाद कॉलोनी में भारी आक्रोश है। रहवासियों ने कहा कि वे और उनके बच्चे हर दिन डर के साये में जीने को मजबूर हैं। रात में सोते समय भी यह डर लगा रहता है कि कहीं छत या दीवार न गिर जाए। खदान में दिनभर मेहनत करने वाले कर्मियों को घर पर भी सुकून नहीं मिल पा रहा है।
कॉलोनी के वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि ये क्वार्टर दशकों पुराने हैं और इनका रखरखाव लंबे समय से नहीं हुआ है। बारिश के मौसम में हालात और खराब हो जाते हैं। सीलन और रिसाव के कारण दीवारें कमजोर हो चुकी हैं। कई परिवारों ने अपने खर्च पर मामूली मरम्मत कराई है, लेकिन ढांचा इतना कमजोर है कि वह टिक नहीं पाता।
रहवासियों ने प्रबंधन से मांग की है कि सभी आवासों का तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। जर्जर हो चुके क्वार्टरों की मरम्मत या पुनर्निर्माण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। यदि प्रबंधन जल्द कदम नहीं उठाता है तो कर्मचारी संगठन आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।
यह घटना सिर्फ एक छज्जे के गिरने की नहीं है, बल्कि एसईसीएल की आवासीय कॉलोनियों में रहने वाले हजारों कर्मियों की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। समय रहते ध्यान न दिया गया तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
