कुशीनगर। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने मानदेय वृद्धि को अपर्याप्त बताते हुए अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। संगठन का कहना है कि जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन उसके अनुरूप मानदेय में वृद्धि नहीं की गई है।
महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। संगठन का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाला मानदेय उनकी मेहनत के अनुरूप नहीं है।
संघ के अनुसार, शासनादेश के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में 1,500 रुपये और सहायिकाओं के मानदेय में 750 रुपये की वृद्धि की गई है। इसके बावजूद संगठन का कहना है कि यह बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है।
आंगनबाड़ी कर्मचारियों ने मांग की है कि उन्हें संविदा परिषद में शामिल किया जाए और कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं का न्यूनतम मानदेय 18 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए।
इसके अलावा संगठन ने पोषण ट्रैकर ऐप में जीपीएस की अनिवार्यता समाप्त करने की भी मांग उठाई। उनका कहना है कि जीपीएस के कारण ऐप के संचालन में तकनीकी समस्याएं आती हैं, जिससे कार्य प्रभावित होता है। इसलिए इसे पहले की तरह बिना जीपीएस के संचालित किया जाए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान जिलाध्यक्ष रजिया आगा, जिला संस्थापक जितेंद्र दीक्षित, जिला महामंत्री रेनू राय, जिला अध्यक्ष प्रतिनिधि सुरेश मिश्र, प्रदेश उपाध्यक्ष मीरा दुबे सहित विभिन्न ब्लॉकों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
रिपोर्ट: अहमद हुसैन
स्थान: कुशीनगर, उत्तर प्रदेश
