वॉशिंगटन। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति कानूनी विवादों में घिर गई है। 25 अमेरिकी राज्यों ने भारत समेत करीब 60 देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर लगाए गए नए शुल्क के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है।
याचिका में राज्यों ने 10 प्रतिशत से 12.5 प्रतिशत तक के आयात शुल्क को अवैध बताते हुए अदालत से इन्हें तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग की है। साथ ही, अब तक वसूले गए शुल्क को आयातकों को वापस लौटाने की भी अपील की गई है।
मुकदमे में कहा गया है कि इन नए टैरिफ से अमेरिकी उपभोक्ताओं, कारोबारियों और उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। राज्यों का तर्क है कि इस फैसले का असर घरेलू बाजार और व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
इस कानूनी चुनौती का नेतृत्व न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स समेत 25 राज्यों के अटॉर्नी जनरल कर रहे हैं। उनका कहना है कि राष्ट्रपति के अधिकारों का दायरा सीमित है और ऐसे व्यापक आयात शुल्क लगाने के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने ट्रंप प्रशासन ने भारत, यूरोपीय संघ और अन्य 59 देशों से आने वाले कुछ उत्पादों पर नए आयात शुल्क लगाने का फैसला किया था। प्रशासन का तर्क था कि संबंधित देश जबरन श्रम से बने उत्पादों पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहे हैं।
इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति अदालतों में चुनौती का सामना कर चुकी है। पिछले वर्ष व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल का आधार बनाकर लगाए गए कुछ शुल्कों पर सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के अधिकारों को सीमित माना था, जिसके बाद सरकार को कुछ आयातकों को शुल्क वापस करना पड़ा था।
अब ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट, 1974 की धारा 301 (Section 301) के तहत नए टैरिफ लागू किए हैं। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह कदम पूरी तरह कानूनी है और इसका उद्देश्य अमेरिकी श्रमिकों, उद्योगों तथा व्यापारिक हितों की रक्षा करना है।
फिलहाल इस मामले की सुनवाई अदालत में होगी और उसका फैसला आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नए आयात शुल्क लागू रहेंगे या उन पर रोक लगेगी।
