हैदराबाद। हैदराबाद मेट्रो रेल के विस्तार की योजना अब भी मंजूरी का इंतजार कर रही है, जबकि देश के कई अन्य शहरों में मेट्रो परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। मेट्रो फेज-II की स्वीकृति और फेज-I के राज्य सरकार को हस्तांतरण को लेकर अनिश्चितता के कारण हैदराबाद का विस्तार कार्य ठप पड़ा हुआ है।
वर्तमान में हैदराबाद मेट्रो का नेटवर्क 69.2 किलोमीटर लंबा है और यह तीन प्रमुख कॉरिडोर पर संचालित हो रहा है।
साल 2021 में तत्कालीन राज्य सरकार ने BHEL से लकड़ी का पुल (लाकड़ीकापुल) तक 26 किलोमीटर और एलबी नगर से नागोल तक 5 किलोमीटर विस्तार का विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) केंद्र सरकार को भेजा था। इसके अलावा कोकापेट मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम और वारंगल नियो मेट्रो का भी प्रस्ताव दिया गया था।
इन परियोजनाओं की डीपीआर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) और महाराष्ट्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने तैयार की थी। पूर्व मंत्री के.टी. रामाराव ने भी कई बार केंद्र सरकार से इन प्रस्तावों को जल्द मंजूरी देने की मांग की थी।
हालांकि, वर्ष 2023 में केंद्र सरकार ने यात्रियों की अनुमानित संख्या और पीक ऑवर ट्रैफिक (PHPDT) को अपेक्षा से कम बताते हुए हैदराबाद मेट्रो फेज-II के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी।
दिसंबर 2023 में नई राज्य सरकार बनने के बाद फेज-IIA के तहत 122 किलोमीटर में फैले सात नए रूट और फेज-IIB के तहत तीन अतिरिक्त रूट प्रस्तावित किए गए। लेकिन अब तक इन योजनाओं को भी मंजूरी नहीं मिल सकी है।
इस बीच, मेट्रो फेज-I के राज्य सरकार को हस्तांतरण की प्रक्रिया भी लंबित है। केंद्र सरकार ने हाल ही में SBI Capital Markets Limited (SBICAPS) को परियोजना का वित्तीय मूल्यांकन और परिसंपत्तियों का आकलन करने की जिम्मेदारी देने पर सहमति जताई है। इसी एजेंसी से फेज-II की वित्तीय संरचना का भी अध्ययन कराया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने हाल ही में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर को पत्र लिखकर इस प्रक्रिया में तेजी लाने और कार्यादेश जल्द अंतिम रूप देने का अनुरोध किया है।
वहीं दूसरी ओर, जनवरी 2024 से अब तक केंद्र सरकार बेंगलुरु, चेन्नई, अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, पुणे और दिल्ली समेत कई शहरों में 380 किलोमीटर से अधिक लंबाई की नई मेट्रो परियोजनाओं को मंजूरी दे चुकी है। इनमें बेंगलुरु मेट्रो फेज-III (44.65 किमी), चेन्नई मेट्रो फेज-II (118.9 किमी) और लखनऊ मेट्रो फेज-IB (11.16 किमी) जैसी प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं।
हैदराबाद मेट्रो के विस्तार में लगातार हो रही देरी को लेकर राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर मंजूरी मिलने से शहर की बढ़ती यातायात समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
