बुरहानपुर। दसवें मुहर्रम यानी आशूरा के अवसर पर शुक्रवार को बुरहानपुर में शिया मुस्लिम समाज ने शहीदे-ए-कर्बला हजरत इमाम हुसैन और हजरत अब्बास इब्ने अली की शहादत की याद में पारंपरिक मातमी जुलूस निकाला। इस दौरान पूरे शहर में “या हुसैन” और “या अब्बास” की सदाएं गूंजती रहीं तथा अकीदतमंदों ने मातम कर कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
26 जून 2026 को आयोजित यह मातमी जुलूस सिंधीपुरा स्थित इमाम बारगाह से प्रारंभ हुआ। इसके बाद जुलूस अशूर खाना मरहूम सैय्यद मोहम्मद अली आबेदी (भाई साहब), अशूर खाना मसर्रत भाई और दीवान खाना नवाब साहब से होते हुए पुनः अशूर खाना (भाई साहब) पहुंचकर संपन्न हुआ।
जुलूस में बड़ी संख्या में शिया समाज के लोग, युवा और बच्चे शामिल हुए। अकीदतमंदों ने मातम करते हुए कर्बला की घटना को याद किया और इमाम हुसैन की कुर्बानी को इंसानियत, न्याय, सत्य और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बताया।
समाज के लोगों ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने अपने परिवार सहित शहादत देकर अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध डटकर मुकाबला किया तथा पूरी मानवता को सत्य, न्याय और भाईचारे का संदेश दिया, जो आज भी लोगों के लिए प्रेरणा है।
जुलूस की सदारत जनाब इफ्तेखार अली (जनि पहलवान), जिया खान, फहीम भाई और मुन्नवर भाई (मुन्नू) ने की। वहीं तंजीम की ओर से इमरान भाई, वसीम भाई, युसूफ भाई, यूनुस भाई, शेरू भाई, फरहान भाई, काजमैन भाई, नकी, अदनान और ताजदार सहित अनेक युवाओं ने व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाली।
मातमी जुलूस के दौरान पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए अकीदतमंदों ने देश में अमन, शांति, भाईचारे और इंसानियत की दुआ मांगी।
आशूरा के अवसर पर आयोजित इस धार्मिक आयोजन ने शहर की गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी सौहार्द और सामाजिक एकता की परंपरा को एक बार फिर मजबूत करने का संदेश दिया।
