Questions Raised Over Arjuni Dam Renovation Work, Allegations Of Poor Quality And Safety Lapses
बलौदाबाजार। सोनाखान क्षेत्र स्थित अर्जुनी डेम में करोड़ों रुपये की लागत से चल रहे जीर्णोद्धार कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। लगभग 5 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से किए जा रहे मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता किए जाने तथा मजदूरों की सुरक्षा की अनदेखी के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जानकारी के अनुसार अर्जुनी डेम में इन दिनों व्यापक जीर्णोद्धार कार्य जारी है। हालांकि निर्माण स्थल से सामने आई तस्वीरों और स्थानीय नागरिकों के आरोपों ने कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का दावा है कि निर्माण में मानक सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा है और कई स्थानों पर जमे हुए सीमेंट तथा अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार और संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारी निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि मरम्मत कार्य केवल औपचारिकता बनकर रह गया है और यदि गुणवत्ता में सुधार नहीं किया गया तो पहली ही तेज बारिश में निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
मामले का दूसरा गंभीर पहलू मजदूरों की सुरक्षा से जुड़ा है। निर्माण स्थल पर कार्यरत श्रमिकों के पास आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की कमी देखी जा रही है। आरोप है कि कई मजदूर बिना हेलमेट, सुरक्षा बेल्ट और अन्य जरूरी सुरक्षा साधनों के भारी लोहे की संरचनाओं के बीच काम करने को मजबूर हैं। इससे किसी भी समय दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विभागीय निरीक्षण के बावजूद कथित अनियमितताओं पर अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और सरकारी कार्यों की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन एवं कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य में अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सके।
फिलहाल अर्जुनी डेम के जीर्णोद्धार कार्य को लेकर उठे सवालों पर प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। अब देखना होगा कि जांच के बाद आरोपों में कितनी सच्चाई सामने आती है और संबंधित एजेंसियां इस मामले में क्या कदम उठाती हैं।
