Tiger ‘Bajrang’ Surrounded By Safari Vehicles In Bandhavgarh, Questions Raised Over Rule Violations
उमरिया। बाघों के लिए विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पर्यटन नियमों के उल्लंघन का एक चिंताजनक मामला सामने आया है। ताला कोर जोन में एक बाघ के चारों ओर सफारी वाहनों की घेराबंदी किए जाने की घटना ने वन्यजीव संरक्षण और पर्यटक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, घटना ताला कोर जोन के कबीर आश्रम क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां चर्चित बाघ ‘बजरंग’ शिकार करने के बाद बैठा हुआ था। इसी दौरान बाघ की मौजूदगी की सूचना फैलते ही सफारी पर निकली कई जिप्सियां मौके पर पहुंच गईं। बताया जा रहा है कि दर्जनभर के करीब सफारी वाहन बाघ के आसपास एकत्र हो गए और उसे चारों ओर से घेर लिया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस दौरान बाघ ने वहां से निकलने का प्रयास भी किया, लेकिन वाहनों की भीड़ के कारण उसके लिए रास्ता सीमित हो गया। हालांकि बाघ ने कोई आक्रामक प्रतिक्रिया नहीं दी और स्थिति नियंत्रण में रही। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाघ उत्तेजित हो जाता तो पर्यटकों और कर्मचारियों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता था।
घटना ने इस बात पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि पार्क क्षेत्र में मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध होने के बावजूद बाघ की सटीक लोकेशन इतनी तेजी से कैसे फैल गई। इसके अलावा वन्यजीव दर्शन के निर्धारित नियमों और दूरी के मानकों का पालन भी सवालों के घेरे में है।
वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल बाघों के प्राकृतिक व्यवहार को प्रभावित करती हैं, बल्कि वन्यजीव पर्यटन की मूल भावना के भी विपरीत हैं। नियमों के अनुसार किसी भी वन्यजीव को घेरना, उसका रास्ता रोकना या उसके व्यवहार में हस्तक्षेप करना प्रतिबंधित है।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर योहान कटारा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि घटना की जानकारी प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि नियमों के उल्लंघन के मामले की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर संबंधित जिप्सी चालकों, गाइडों तथा अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पार्क प्रबंधन ने सभी पर्यटकों, गाइडों और वाहन चालकों से वन्यजीव पर्यटन के नियमों का पालन करने तथा बाघों और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार में हस्तक्षेप न करने की अपील की है।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि वन्यजीव पर्यटन का उद्देश्य केवल दर्शन नहीं, बल्कि वन्यजीवों और उनके आवास का सम्मान और संरक्षण भी है।
