Row Over 48-Hour Rule: CAPF Bill Not Introduced in Rajya Sabha Amid Opposition Protest
नई दिल्ली: Supreme Court of India ने मोटर दुर्घटना मुआवजे से जुड़े मामलों में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि नियोक्ता द्वारा दी गई ग्रुप बीमा योजनाओं या अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों की राशि को मोटर व्हीकल ऐक्ट के तहत मिलने वाले मुआवजे से नहीं घटाया जा सकता।
जस्टिस Pankaj Mithal की अगुवाई वाली बेंच ने 17 मार्च को केरल और कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसलों को बरकरार रखते हुए अपीलों को खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से मिलने वाले लाभ “आर्थिक लाभ” की श्रेणी में नहीं आते, इसलिए उन्हें मुआवजे से कम नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी साफ किया कि नियोक्ता द्वारा दिया गया बीमा एक अलग अनुबंध का हिस्सा होता है और उसका मोटर वाहन अधिनियम के तहत मिलने वाले वैधानिक मुआवजे से सीधा संबंध नहीं है।
कोर्ट ने ‘डबल बेनिफिट’ (दोहरा लाभ) के तर्क को भी खारिज करते हुए कहा कि इससे दावेदारों के अधिकारों में कटौती नहीं की जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि निर्धारित मुआवजा 6 सप्ताह के भीतर दिया जाए और स्पष्ट किया कि केवल वही लाभ मुआवजे से घटाए जा सकते हैं, जिनका दुर्घटना से सीधा संबंध हो।
