नई दिल्ली। 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी करार दिए गए अबू सलेम की समय से पहले रिहाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सलेम का दावा है कि वह जेल में 25 साल की सजा पूरी कर चुका है, इसलिए उसे रिहा किया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान अबू सलेम के वकील ने अदालत में दलील दी कि विशेष टाडा (TADA) कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट किया था कि अंडरट्रायल के दौरान जेल में बिताई गई अवधि का लाभ सजा में जोड़ा जाएगा। हालांकि, उनका आरोप है कि जेल प्रशासन इस अवधि को सजा में शामिल नहीं कर रहा है।
वकील ने अदालत को बताया कि पुर्तगाल से प्रत्यर्पण की शर्तों के अनुसार अबू सलेम ने 24 दिसंबर 2024 को 25 वर्ष की अधिकतम सजा पूरी कर ली थी। उनके अनुसार, अंडरट्रायल के लगभग 11 वर्ष 10 महीने, सजा के तौर पर काटी गई अवधि और अच्छे आचरण के आधार पर मिली छूट को जोड़ने पर 25 साल पूरे हो चुके हैं।
इस मामले में सीबीआई ने अदालत को बताया कि अबू सलेम की रिहाई से पहले उसे ₹16.51 लाख का जुर्माना जमा करना होगा। यह जुर्माना 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट और व्यवसायी प्रदीप जैन हत्या मामले से संबंधित है। सीबीआई का कहना है कि यदि 12 अक्टूबर 2030 तक जुर्माना जमा नहीं किया गया तो अदालत द्वारा निर्धारित अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी।
गौरतलब है कि अबू सलेम फिलहाल नासिक रोड सेंट्रल जेल में बंद है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उसे अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया था। बाद में हाई कोर्ट ने उसकी याचिका पर सुनवाई स्वीकार कर ली थी।
उल्लेखनीय है कि 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट में 257 लोगों की मौत हुई थी। अबू सलेम को वर्ष 2005 में पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। प्रत्यर्पण समझौते की शर्तों के तहत उसकी सजा 25 वर्ष से अधिक नहीं हो सकती। अब उसी शर्त और जेल में बिताई गई अवधि को लेकर कानूनी विवाद जारी है।
