आगरा। उत्तर प्रदेश सरकार भले ही प्रदेश भर में गड्ढा मुक्त सड़कों और चौतरफा विकास का दावा कर रही हो, लेकिन आगरा के श्यामो गांव (बरौली अहीर ब्लॉक, शमशाबाद रोड) की जमीनी हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। गांव के बाहरी हिस्से में जहां चमचमाती आरसीसी सड़कें और नालियां बनी हैं, वहीं अंदरूनी क्षेत्र के निवासी पिछले 35 से 40 वर्षों से नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं।
कच्चा रास्ता होने के कारण बरसात के दिनों में क्षेत्र में भारी जलभराव और गहरा कीचड़ जमा हो जाता है। इस वजह से न केवल कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, बल्कि स्कूली बच्चों का घर से निकलना भी बंद हो जाता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि 40 वर्षों में कई सरकारें, सांसद, विधायक और ग्राम प्रधान बदले, लेकिन उनकी किस्मत नहीं बदली। ग्राम प्रधान सीमा क्षेत्र से बाहर होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं, जबकि जनप्रतिनिधि चुनाव के बाद झांकने तक नहीं आते।
ग्रामीणों के अनुसार, 95 फीसदी आबादी सत्ताधारी दल की समर्थक होने के बावजूद उन्हें कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से केवल आश्वासन और फटकार ही मिली है। आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क और नाली का निर्माण नहीं कराया गया, तो वे भूख हड़ताल और आंदोलन करेंगे। साथ ही आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव का पूर्ण बहिष्कार करने का भी निर्णय लिया गया है।
