Question to Nitish Kumar: Did You Develop Bihar or Push It Into Crisis?
सम्मानित आदरणीय श्री नीतीश कुमार जी,
याद है आपको 2025? जब जनता ने आपको चेहरा मानकर 202 सीटों का जनादेश दिया था। लोगों ने कहा कि “नीतीश हैं, तो भरोसा है।”
लेकिन आज वही जनता पूछ रही है कि आपने बिहार का ये क्या हाल कर दिया?
चुनाव के वक्त ₹10,000 महिलाओं के खाते में…
125 यूनिट फ्री बिजली… आंगनबाड़ी, आशा, सहायिका का बढ़ा मानदेय… सामाजिक सुरक्षा पेंशन तीन गुना…
सब कुछ ऐसे बांटा गया जैसे खजाना कभी खत्म ही नहीं होगा।
लेकिन सच क्या था? क्या ये योजनाएं बिहार के विकास के लिए थीं… या सिर्फ चुनाव जीतने का हथियार?
उस वक्त वित्त मंत्री थे सम्राट चौधरी
और खेल कुछ ऐसा हुआ कि
आपके चेहरे के पीछे पूरी रणनीति बदल दी गई।
आपकी कमजोर होती राजनीतिक पकड़…
आपकी गिरती सेहत…
और उसी का फायदा उठाकर
बिहार को “फ्री योजनाओं” के जाल में धकेल दिया गया।
आज नतीजा सामने है बिहार खड़ा है आर्थिक संकट के मुहाने पर।
10 लाख कर्मचारी सैलरी का इंतज़ार कर रहे हैं…
मार्च का वेतन तक नहीं मिला।
इतना ही नहीं, माननीय विधायक तक अपनी सैलरी का इंतज़ार कर रहे हैं।
सोचिए… जब सरकार चलाने वालों की जेब खाली है,
तो आम आदमी की हालत क्या होगी?
नीतीश जी, ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं…
ये टूटते हुए भरोसे की आवाज है।
हम आपको आज भी “सुशासन बाबू” कहकर याद करते हैं…
लेकिन क्या यही सुशासन है?
अगर ये कीमत है उन ₹10,000 की…
तो हमें नहीं चाहिए।
अगर ये कीमत है मुफ्त बिजली की…
तो उसे भी वापस ले लीजिए।
हमें खैरात नहीं चाहिए…
हमें विकास चाहिए।
हमें वो बिहार चाहिए
जहां नौकरी समय पर मिले,
जहां सैलरी रुके नहीं,
जहां सरकार मजबूती से खड़ी हो
न कि मुफ्त योजनाओं के बोझ से डगमगाए।
नीतीश जी,
आप जाते-जाते बिहार को क्या देकर जा रहे हैं?
एक मजबूत राज्य…
या कर्ज और संकट में डूबा हुआ भविष्य?
आज बिहार की जनता आपसे जवाब मांग रही है।
आपने ये क्या किया?
और तो और देखिए, बीजेपी आपका उत्तराधिकारी किसे बना रही।परिवारवाद का आप जिंदगी भर विरोध करते आए, अपने कभी इसपर समझौता नहीं किया।
क्या आपका विकल्प परिवारवाद का प्रोडक्ट बनेगा?
नीतीश जी आपने ये क्या किया?
बिहार जी जनता का नीतीश के नाम एक पत्र !
