Middle East War Enters Dangerous Phase on Day 37, US-Iran Tensions Rise
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। संघर्ष का आज 37वां दिन है और हालात हर गुजरते दिन के साथ और ज्यादा गंभीर होते जा रहे हैं। क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव अब वैश्विक चिंता का कारण बन गया है।
United States और Israel ने Iran के खिलाफ अपने हमले तेज कर दिए हैं। संयुक्त सैन्य कार्रवाई के तहत ईरान के कई अहम ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आ रही हैं। तेल डिपो और संवेदनशील सैन्य ठिकानों के साथ-साथ परमाणु प्रतिष्ठानों पर भी हमलों की बात कही जा रही है। इसके जवाब में ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह अमेरिकी और इजरायली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगा।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को एक और बड़ा अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान 48 घंटे के भीतर Strait of Hormuz को खोल दे या फिर समझौते की राह पर आए। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर बड़े हमले किए जा सकते हैं।
हालांकि यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने इस तरह की चेतावनी दी हो। 22 मार्च को भी उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए 48 घंटे का समय दिया था और ईरान के पावर प्लांट को निशाना बनाने की धमकी दी थी। इसके बाद 23 मार्च को उन्होंने दावा किया कि सकारात्मक संकेत मिलने पर हमलों को पांच दिन के लिए टाल दिया गया। फिर 26 मार्च को यह कहा गया कि ईरान के अनुरोध पर पावर प्लांट पर हमलों को दस दिन तक रोकने की बात की गई थी।
इसके बावजूद ईरान अपने रुख पर कायम रहा। इसके बाद ट्रंप ने और कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान को “पाषाणकाल में वापस भेजने” तक की चेतावनी दे डाली। वहीं ईरानी सेना ने इन अल्टीमेटम को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि अमेरिका जंग में दबाव बनाने के लिए इस तरह की धमकियों का सहारा ले रहा है।
Islamic Revolutionary Guard Corps के कमांडरों ने भी ट्रंप की चेतावनियों को खारिज करते हुए कहा है कि ईरान किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है। उनका कहना है कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ा तो इसके गंभीर परिणाम होंगे और पूरा इलाका युद्ध की आग में घिर सकता है।
दरअसल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे अहम समुद्री मार्ग माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।
ट्रंप अब तक तीन बार ईरान को अल्टीमेटम दे चुके हैं, लेकिन हर बार तेहरान ने इसे खारिज कर दिया। इससे दोनों देशों के बीच टकराव और गहराता दिखाई दे रहा है।
इस बीच अमेरिका ने अपनी सबसे घातक और हाई-टेक क्रूज मिसाइलों में से एक AGM-158 JASSM-ER की तैनाती भी बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मार्च के अंत तक बड़ी संख्या में JASSM-ER मिसाइलें ईरान मोर्चे पर भेजी गईं और चार हफ्तों के भीतर सैकड़ों मिसाइलें दागे जाने का दावा किया गया।
JASSM-ER एक लंबी दूरी की एयर-टू-सर्फेस स्टैंडऑफ मिसाइल मानी जाती है जिसकी रेंज 900 किलोमीटर से अधिक बताई जाती है। इसकी स्टेल्थ तकनीक, GPS और इंफ्रारेड सीकर इसे बेहद सटीक और खतरनाक बनाते हैं। करीब 450 किलोग्राम वॉरहेड ले जाने वाली यह मिसाइल दुश्मन की एयर डिफेंस से बचते हुए गहराई तक हमला करने में सक्षम मानी जाती है।
इसे खास तौर पर हाई-वैल्यू टारगेट्स को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है और इसे B-1B, B-2 तथा F-15E जैसे लड़ाकू विमानों से दागा जा सकता है।
एक तरफ JASSM-ER जैसी हाई-टेक मिसाइलों की तैनाती और दूसरी तरफ लगातार बढ़ती चेतावनियों ने साफ कर दिया है कि यह संघर्ष अब और ज्यादा संवेदनशील और खतरनाक चरण में प्रवेश कर चुका है। ऐसे हालात में मिडिल ईस्ट की यह जंग सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
