Farmer Suicides Remain a Major Concern: 10,546 Farmers and Farm Workers Died by Suicide in 2024
National Crime Records Bureau (NCRB) की 2024 की ताजा रिपोर्ट में किसानों और खेतिहर मजदूरों की आत्महत्या को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में देशभर में खेती-किसानी से जुड़े कुल 10,546 लोगों ने आत्महत्या की।
इनमें 4,633 किसान और खेती से जुड़े अन्य लोग शामिल हैं, जबकि 5,913 खेतिहर मजदूरों ने अपनी जान दी। यह आंकड़ा देश में कुल आत्महत्याओं की संख्या 1,70,746 का करीब 6.2 प्रतिशत है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 2023 की तुलना में 2024 में किसान और खेतिहर मजदूरों की आत्महत्याओं में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। 2023 में यह संख्या 10,786 थी। इससे पहले 2022 के मुकाबले 2023 में भी करीब 4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी।
महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मामले
राज्यवार आंकड़ों में Maharashtra सबसे ऊपर रहा, जहां 3,824 किसानों और खेतिहर मजदूरों ने आत्महत्या की। इसके बाद Karnataka में 2,971, Madhya Pradesh में 835, Andhra Pradesh में 780 और Tamil Nadu में 503 मामले दर्ज किए गए।
रिपोर्ट के अनुसार, आत्महत्या के ज्यादा मामले उन इलाकों में देखने को मिले जहां किसान मुख्य रूप से कपास और गन्ने जैसी नकदी फसलों की खेती करते हैं। फसल खराब होने, कम उत्पादन और आर्थिक संकट के चलते कई किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ जाता है।
आर्थिक दबाव बना बड़ी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि खेती में बढ़ती लागत, मौसम की मार और कर्ज के दबाव के कारण किसान मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। कई मामलों में किसान साहूकारों और निजी कर्जदाताओं से उधार लेने को मजबूर हो जाते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।
हालांकि सरकार की फसल बीमा योजनाएं, सस्ती ब्याज दर पर कृषि ऋण और आर्थिक सहायता कार्यक्रमों के विस्तार को आत्महत्या के मामलों में मामूली कमी की एक वजह माना जा रहा है।
NCRB ने स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े आत्महत्या करने वाले व्यक्तियों के पेशे को दर्शाते हैं, जरूरी नहीं कि आत्महत्या का कारण केवल खेती या कृषि संकट ही हो।
