Turkey Revives $15 Billion Canal Project Amid Hormuz Strait Crisis
होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव और जहाजों की आवाजाही पर पड़े असर ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है। इस संकट ने दुनिया को यह एहसास कराया है कि किसी भी अहम समुद्री व्यापार मार्ग में रुकावट का असर सीधे तेल, गैस और सप्लाई चेन पर पड़ता है। इसी बीच तुर्की ने अपनी लंबे समय से चर्चा में रही “इस्तांबुल कनाल” परियोजना पर दोबारा विचार शुरू कर दिया है। इस परियोजना का उद्देश्य बोस्फोरस जलडमरूमध्य के समानांतर एक नया कृत्रिम जलमार्ग बनाना है, जिससे तुर्की को भारी राजस्व मिलने की उम्मीद है।
हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जहाजों के लिए प्राकृतिक बोस्फोरस मार्ग पहले से मौजूद है और वहां से गुजरने की स्वतंत्रता अंतरराष्ट्रीय संधियों के तहत सुरक्षित है, तो आखिर जहाज नई कृत्रिम नहर के लिए शुल्क क्यों चुकाएंगे?
1. होर्मुज संकट ने बढ़ाई चिंता
शिपिंग आंकड़ों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पिछले करीब दो महीनों से गंभीर रूप से प्रभावित रही है। 28 फरवरी को ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच संघर्ष शुरू होने से पहले हर दिन लगभग 140 जहाज इस मार्ग से गुजरते थे। लेकिन तनाव बढ़ने के बाद हालात ऐसे हो गए कि 24 घंटे में केवल तीन जहाज ही वहां से गुजर पाए। इस रुकावट के कारण दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और LNG सप्लाई प्रभावित हुई है।
2. बोस्फोरस का रणनीतिक महत्व
तुर्की दुनिया के एक और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग—बोस्फोरस और डार्डानेल्स—पर स्थित है, जो काला सागर को भूमध्य सागर से जोड़ता है। बोस्फोरस से जहाजों की आवाजाही 1936 की मॉन्टो संधि के तहत नियंत्रित होती है। इस समझौते के अनुसार, शांति काल में नागरिक जहाजों को यहां से गुजरने की स्वतंत्रता प्राप्त है, जबकि युद्धपोतों की आवाजाही सीमित रहती है। यही वजह है कि तुर्की इस प्राकृतिक मार्ग को पूरी तरह टोल आधारित प्रणाली में नहीं बदल पाया।
3. क्या है इस्तांबुल कनाल परियोजना?
तुर्की की प्रस्तावित “इस्तांबुल कनाल” परियोजना इस्तांबुल के यूरोपीय हिस्से में एक नए जलमार्ग के निर्माण से जुड़ी है। यह नहर कुचुकसेकमेस, साजलिडेरे और दुरुसु क्षेत्र से होकर गुजरने वाली करीब 45 किलोमीटर लंबी परियोजना होगी। इसकी प्रस्तावित चौड़ाई 275 मीटर और गहराई 21 मीटर रखी गई है, ताकि बड़े व्यावसायिक जहाज आसानी से गुजर सकें।
4. सबसे बड़ी चुनौती—टोल वसूली
इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जहाज कंपनियों को भुगतान करके नए मार्ग का इस्तेमाल करने के लिए कैसे तैयार किया जाए। क्योंकि बोस्फोरस से गुजरना अभी भी अंतरराष्ट्रीय संधि के तहत संभव है। ऐसे में तुर्की को नई नहर के जरिए जहाजों को समय की बचत, कम ट्रैफिक और तय समय स्लॉट जैसी सुविधाएं देनी होंगी।
तुर्की के परिवहन मंत्रालय के अनुसार, साल 2024 में बोस्फोरस से गुजरने वाले 51 हजार से अधिक जहाजों से लगभग 22.74 करोड़ डॉलर का राजस्व हासिल हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई नहर तेज और सुरक्षित मार्ग साबित होती है, तो खास तौर पर कीमती माल ढोने वाले जहाज अतिरिक्त शुल्क देकर भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
5. 15 अरब डॉलर का बड़ा दांव
रॉयटर्स की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस परियोजना की शुरुआती अनुमानित लागत करीब 1.95 अरब डॉलर बताई गई थी। हालांकि बाद की कई रिपोर्टों में इसकी लागत कहीं अधिक आंकी गई। कुछ आकलनों में यह खर्च 15 अरब डॉलर तक बताया गया है, जबकि आलोचकों का कहना है कि कुल लागत 65 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।
तुर्की सरकार ने पहले कहा था कि परियोजना फिलहाल उसकी प्राथमिकता में नहीं है और पर्याप्त फंडिंग मिलने पर ही आगे बढ़ाई जाएगी। लेकिन होर्मुज संकट के बाद इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।
