जालौन: उत्तर प्रदेश के जालौन में करीब 200 वर्ष पुराना ऐतिहासिक ताईबाई महल रविवार को भरभराकर ढह गया। यह वही ऐतिहासिक भवन है, जहां कई वर्षों तक तहसील का संचालन होता रहा। गनीमत रही कि घटना के समय तहसील में अवकाश था और भवन पहले ही खाली कराया जा चुका था, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।
बताया जा रहा है कि यह इमारत लंबे समय से जर्जर हालत में थी। भवन की खराब स्थिति को देखते हुए कुछ समय पहले तहसील कार्यालय को नई इमारत में स्थानांतरित कर दिया गया था। इसी कारण बड़ा हादसा टल गया।
1857 की क्रांति से जुड़ा है महल का इतिहास
ताईबाई का नाम 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगनाओं में प्रमुखता से लिया जाता है। उनका संबंध रानी लक्ष्मीबाई से रहा और उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1858 में अंग्रेजों को पराजित करने के बाद जालौन क्षेत्र पर उनका अधिकार स्थापित हुआ था।
नगर के मध्य स्थित यह महल ताईबाई का निवास स्थान था और बाद में इसी भवन में तहसील कार्यालय संचालित किया गया। इसलिए यह इमारत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती थी।
तात्या टोपे के साथ लड़ी थीं अंग्रेजों के खिलाफ
इतिहास के अनुसार, ताईबाई ने तात्या टोपे के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध कई युद्ध लड़े। कानपुर में तात्या टोपे की हार के बाद भी उन्होंने संघर्ष जारी रखा। अपने आभूषण बेचकर सेना तैयार की और चरखारी सहित जालौन, कालपी, उरई, कोंच, कोटरा और आसपास के क्षेत्रों से अंग्रेजों का प्रभाव समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बाद में अंग्रेजों ने उन्हें राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर आजीवन कारावास की सजा सुनाई और जालौन से दूर मुंगेर (बिहार) भेज दिया, जहां कैद के दौरान 1870 में उनका निधन हो गया।
प्रतिमा स्थापना की मांग तेज
ताईबाई के ऐतिहासिक योगदान को देखते हुए जालौन के लोग लंबे समय से उनकी प्रतिमा स्थापित करने की मांग कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और विभिन्न संगठनों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर देवनगर चौराहे पर ताईबाई की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की है।
ऐतिहासिक महल के ढहने के बाद अब इसकी विरासत को संरक्षित करने और ताईबाई के योगदान को सम्मान देने की मांग और तेज हो गई है।
रिपोर्ट: भीम राजावत
स्थान: जालौन
