What Is Form-7? Election Commission Issues Strict Order Amid SIR Controversy in Uttar Pradesh
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान गलत तरीके से नाम कटवाने को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर कई राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग से शिकायत की है। बढ़ते विवाद के बीच चुनाव आयोग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए नए निर्देश जारी किए हैं।
चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि किसी भी मतदाता का नाम हटाने के लिए केवल वही व्यक्ति फॉर्म-7 जमा कर सकता है, जिसने वह फॉर्म स्वयं भरा हो। कोई भी व्यक्ति किसी अन्य नागरिक की ओर से फॉर्म-7 न तो भर सकता है और न ही बीएलओ या चुनाव अधिकारी के पास जमा करा सकता है।
सीईओ का स्पष्ट निर्देश
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति डाक के जरिए भी कई लोगों के फॉर्म-7 इकट्ठा कर जमा करता है, तो ऐसे फॉर्म स्वीकार नहीं किए जाएंगे। झूठी या निराधार शिकायत कर किसी का नाम वोटर लिस्ट से हटाना संभव नहीं होगा।
उन्होंने बताया कि फॉर्म-7 भरने वाले व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में होना अनिवार्य है। साथ ही फॉर्म में अपना पूरा विवरण देना जरूरी होगा, जिसमें नाम, वोटर फोटो पहचान पत्र (EPIC) नंबर और मोबाइल नंबर शामिल हैं।
परिवार के सदस्य भर सकते हैं फॉर्म-7
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अगर परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु हो गई हो या वह स्थायी रूप से कहीं और स्थानांतरित हो गया हो, तो परिवार का कोई भी सदस्य फॉर्म-7 भर सकता है। एक ही परिवार में ऐसे कई मामलों में एक से अधिक फॉर्म-7 भी जमा किए जा सकते हैं।
क्या होता है फॉर्म-7?
फॉर्म-7 भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रपत्र है। इसका उपयोग मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने या नाम से जुड़ी आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। यह फॉर्म बीएलओ के माध्यम से या निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट से ऑनलाइन प्राप्त किया जा सकता है।
आपत्तिकर्ता और संबंधित वोटर—दोनों को नोटिस
जिस व्यक्ति ने फॉर्म-7 भरा है और जिस मतदाता का नाम हटाने की मांग की गई है, दोनों को नोटिस भेजे जाने का प्रावधान है। संबंधित पक्षों की सुनवाई के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाती है।
झूठी शिकायत पर एफआईआर का प्रावधान
अगर जांच में यह पाया गया कि फॉर्म-7 झूठी जानकारी के आधार पर भरा गया है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सकती है। वोटर धोखाधड़ी के मामले में कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है।
राजनीतिक दलों के आरोप और आयोग के आंकड़े
राजनीतिक दलों ने आरोप लगाए हैं कि विरोधी दल अपने समर्थकों के जरिए अन्य दलों के वोटरों के नाम कटवाने के लिए फॉर्म-7 भरवा रहे हैं। हालांकि चुनाव आयोग के आंकड़े कुछ और ही तस्वीर पेश करते हैं।
आयोग के अनुसार, राज्य में विभिन्न राजनीतिक दलों के कुल 5.79 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) हैं, लेकिन अब तक केवल 1627 फॉर्म-7 ही भरे गए हैं। इनमें से 1566 फॉर्म भाजपा, 47 सपा, आठ आम आदमी पार्टी और छह फॉर्म बसपा की ओर से जमा किए गए हैं।
