मुंबई। महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (MAHA TET) 2026 को पेपर लीक की आशंका के चलते परीक्षा से एक दिन पहले रद्द किए जाने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार गुट) समेत कई विपक्षी दलों ने महायुति सरकार पर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महाराष्ट्र टीईटी परीक्षा का रद्द होना परीक्षा व्यवस्था की एक और बड़ी विफलता है। उन्होंने कहा कि लगातार पेपर लीक की घटनाओं से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है और यह केवल परीक्षा रद्द होने का मामला नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रवक्ता अमोल मातेले ने भी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि शिक्षक भर्ती जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा के प्रश्नपत्र सुरक्षित नहीं रह पा रहे हैं, तो अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले भी कई राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोप सामने आ चुके हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि टीईटी परीक्षा रद्द होना परीक्षा प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निष्पक्ष परीक्षा कराने में असफल रही है और इस पूरे मामले की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
कांग्रेस ने भी सोशल मीडिया पर सरकार पर निशाना साधते हुए परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। वहीं अभिजीत दीपके ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए 28 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में छात्र, किसान और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
फिलहाल महाराष्ट्र सरकार की ओर से परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले और पेपर लीक की आशंका को लेकर जांच प्रक्रिया जारी है। मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और परीक्षार्थियों में भी भविष्य की परीक्षा तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
