Will Trump be able to pull off ‘Mission Iran’?
दुनिया की नजरें इस वक्त एक ही सवाल पर टिकी हैं…क्या डोनाल्ड ट्रंप का “मिशन ईरान” सफल हो पाएगा? यह सवाल सिर्फ अंतरराष्ट्रीय राजनीति के गलियारों में ही नहीं, बल्कि खुद अमेरिका के भीतर भी तेजी से उठने लगा है। पिछले 36 दिनों से जारी युद्ध के बाद हालात ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं, जहां ट्रंप की रणनीति और उसके नतीजों पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
युद्ध की शुरुआत में जिस तेजी और निर्णायक परिणाम की उम्मीद की जा रही थी, वैसा कुछ भी जमीन पर होता दिखाई नहीं दे रहा है। न तो ईरान में सत्ता परिवर्तन जैसा कोई संकेत मिला, न ही उसका परमाणु कार्यक्रम खत्म हुआ। इसके अलावा ईरान की मिसाइल ताकत भी कायम है और उसकी नौसेना तथा एयर फोर्स को निर्णायक रूप से कमजोर करने का दावा भी अब सवालों के घेरे में है।
सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज। यह समुद्री रास्ता दुनिया की ऊर्जा सप्लाई की लाइफलाइन माना जाता है। इसी वजह से यहां पैदा हुआ तनाव अब वैश्विक चिंता का कारण बन चुका है।
इस बीच ट्रंप लगातार ईरान को चेतावनी दे रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोला जाए या फिर समझौते के लिए तैयार रहा जाए। इसके लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम भी दिया गया। लेकिन तय समयसीमा खत्म होने के करीब है और ईरान अपने रुख पर अडिग दिखाई दे रहा है। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि दबाव की रणनीति फिलहाल असरदार नहीं रही।
ईरान की तरफ से भी कड़े संदेश लगातार सामने आ रहे हैं। वहां के सैन्य नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि अगर हालात और बिगड़े तो पूरा क्षेत्र संघर्ष की आग में झोंक दिया जाएगा। ईरान साफ कह चुका है कि वह आखिरी दम तक लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है और किसी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
युद्ध के दौरान अमेरिका को भी नुकसान उठाने की खबरें सामने आ रही हैं। कुछ रिपोर्टों में अमेरिकी विमानों के गिरने, सैनिकों के हताहत होने और खाड़ी क्षेत्र में सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचने जैसी बातें कही जा रही हैं। वहीं अमेरिका के भीतर भी इस युद्ध को लेकर विरोध तेज होने लगा है। कई पूर्व सैनिक इसे बड़ी रणनीतिक गलती बता रहे हैं।
इस संघर्ष का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के कारण तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। कई देशों में ऊर्जा संकट जैसे हालात बनते दिख रहे हैं। महंगाई बढ़ रही है, शेयर बाजार दबाव में हैं और नौकरियों पर भी खतरा मंडरा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी अब यह सवाल उठने लगा है कि अगर युद्ध अपने घोषित लक्ष्यों तक नहीं पहुंचा, तो आगे की रणनीति क्या होगी? क्या अमेरिका इस संघर्ष से बाहर निकलने का रास्ता तलाशेगा या फिर यह टकराव और लंबा चलेगा?
फिलहाल दुनिया इसी जवाब का इंतजार कर रही है….क्या ट्रंप ईरान के खिलाफ अपने मिशन में सफल हो पाएंगे या यह युद्ध उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बन जाएगा।
