Rift in NATO: Trump Slams Allies for Refusing to Join Iran War
वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि नाटो के अधिकांश सहयोगी देशों ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में शामिल होने से इनकार कर दिया है। इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि अमेरिका को किसी बाहरी समर्थन की जरूरत नहीं है।
ट्रंप ने बयान में कहा कि कई सहयोगी देशों ने स्पष्ट किया है कि वे ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लेना चाहते। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि लगभग सभी देश इस बात से सहमत हैं कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाना चाहिए।
नाटो देशों के रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें इससे हैरानी नहीं हुई। उन्होंने नाटो को एकतरफा व्यवस्था बताते हुए कहा कि अमेरिका दूसरों की रक्षा करता है, लेकिन जरूरत के समय सहयोगी देश साथ नहीं देते।
इस बीच, सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यूरोपीय देश होर्मुज़ जलडमरूमध्य को चालू रखने के लिए संसाधन देने से बच रहे हैं, जबकि इसका लाभ उन्हें अधिक होता है।
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान की नौसेना, वायुसेना, एयर डिफेंस और रडार सिस्टम को काफी हद तक नष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि इन सफलताओं के बाद अब सहयोगियों की मदद की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को लेकर भी कहा कि अमेरिका को किसी की मदद की जरूरत नहीं है। ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने ब्रिटेन से युद्धपोत भेजने का अनुरोध किया था, लेकिन अपेक्षित जवाब नहीं मिला।
ट्रंप ने विदेशों में तैनात अमेरिकी सैनिकों का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका जापान, दक्षिण कोरिया और जर्मनी जैसे देशों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
गौरतलब है कि 1949 में स्थापित नाटो सामूहिक सुरक्षा के सिद्धांत पर आधारित संगठन है, जिसमें अमेरिका सबसे बड़ा सैन्य और वित्तीय योगदानकर्ता है। रक्षा खर्च और जिम्मेदारी के बंटवारे को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं।
