Nepal’s New Political Era: Can Balen Shah Deliver on Public Expectations?
नेपाल की राजनीति में हालिया चुनाव परिणामों ने एक नया अध्याय खोल दिया है। पहली बार किसी पार्टी को अकेले दम पर स्पष्ट बहुमत मिला है, जिससे लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक अस्थिरता कम होने की उम्मीद जगी है। चार साल पुरानी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए सत्ता हासिल की है। इस पार्टी के प्रमुख नेता रबि लमिछाने पहले भी गठबंधन सरकारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं, लेकिन इस बार पार्टी का स्वरूप और ताकत पहले से काफी अलग नजर आ रही है।
इस राजनीतिक बदलाव का सबसे बड़ा चेहरा काठमांडू के मेयर बालेन शाह माने जा रहे हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए आगे किया गया है। बालेन शाह की पहचान एक बेदाग छवि वाले नेता के रूप में की जाती है और उनका किसी पारंपरिक राजनीतिक दल से सीधा जुड़ाव नहीं रहा है। दिलचस्प बात यह है कि बालेन शाह और रबि लमिछाने दोनों का संबंध पॉपुलर कल्चर से रहा है और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता काफी अधिक है।
नेपाल में हाल के वर्षों में लोकतंत्र और राजशाही को लेकर भी बहस चलती रही है। इंटरनेट उपलब्धता और युवा आंदोलनों के बीच एक समय ऐसा भी लगा था कि राजतंत्र समर्थक ताकतें फिर से सक्रिय हो सकती हैं। हालांकि चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि नेपाली जनता लोकतांत्रिक व्यवस्था को आगे बढ़ाना चाहती है।
लेकिन नई सरकार के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक दबाव बड़ी समस्याएं हैं। खाड़ी क्षेत्र में चल रहे तनाव का असर नेपाल की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है, क्योंकि बड़ी संख्या में नेपाली नागरिक वहीं काम करते हैं और उनकी कमाई से देश में विदेशी मुद्रा आती है। इसके अलावा ईंधन संकट भी नेपाल के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
नेपाल को अपने दो बड़े पड़ोसियों भारत और चीन के बीच संतुलन बनाकर भी चलना पड़ता है। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव कम है, लेकिन नेपाल की कूटनीति के लिए यह हमेशा एक संवेदनशील मुद्दा रहता है।
देश के प्रशासनिक ढांचे में सुधार की जरूरत भी लंबे समय से महसूस की जा रही है। मजबूत नौकरशाही, प्रभावी न्यायपालिका और व्यापार को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था अभी भी पूरी तरह विकसित नहीं हो सकी है। ऐसे में नई सरकार के सामने संस्थागत सुधार की बड़ी जिम्मेदारी है।
नेपाल की अर्थव्यवस्था फिलहाल मुख्य रूप से तीन स्रोतों पर निर्भर रही है—विदेशी सहायता, विदेशों में काम कर रहे नेपाली नागरिकों की कमाई और पर्यटन से होने वाली आय। हालांकि इन स्रोतों से बड़े पैमाने पर स्थायी रोजगार पैदा नहीं हो पाता।
अब नेपाल का युवा वर्ग तेजी से बदल रही दुनिया के साथ कदम मिलाना चाहता है। RSP ने अपने चुनावी घोषणापत्र में अगले पांच वर्षों में नेपाल को 100 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और लगभग 7 प्रतिशत वार्षिक आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
हालांकि इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए बड़े निवेश, आर्थिक सुधार और स्थिर नीतियों की जरूरत होगी। निवेश तभी आएगा जब निवेशकों को नेपाल में विकास की संभावनाएं और स्थिर माहौल नजर आएगा।
अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि क्या बालेन शाह और रबि लमिछाने अपनी नई राजनीतिक ताकत को ठोस नीतियों में बदल पाएंगे और जनता की उम्मीदों पर खरे उतर सकेंगे।
