40 Days of Strikes, Little Impact? Iran’s Nuclear Program Largely Intact, Raises Questions on US-Israel Strategy
अमेरिका: और इजरायल द्वारा किए गए लंबे सैन्य अभियान के बावजूद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। खुफिया आकलनों के मुताबिक, करीब 40 दिनों तक चले हमलों के बाद भी Iran की परमाणु क्षमता पर अपेक्षित असर नहीं पड़ा है।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मूल्यांकन पहले जैसा ही बना हुआ है और इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया। जून 2025 में हुए हमलों के बाद अनुमान लगाया गया था कि ईरान की परमाणु हथियार बनाने की समय-सीमा करीब एक साल तक पीछे चली गई है, लेकिन हालिया युद्ध के बाद भी यह आकलन लगभग वैसा ही है।
जानकारी के मुताबिक, हमलों में Natanz, Fordow और Isfahan जैसे प्रमुख परमाणु ठिकानों को नुकसान पहुंचा, लेकिन कार्यक्रम पूरी तरह बाधित नहीं हुआ।
खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के पास मौजूद लगभग 440 किलोग्राम उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम का बड़ा हिस्सा अब भी सुरक्षित है। अनुमान है कि इसका एक हिस्सा इस्फहान में भूमिगत सुरंगों में छिपा हुआ हो सकता है, जिससे इसकी ट्रैकिंग मुश्किल हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध से पहले ईरान 3 से 6 महीनों में परमाणु बम बनाने की स्थिति के करीब था। हमलों के बाद यह समय-सीमा बढ़कर 9 महीने से 1 साल तक पहुंच गई, लेकिन खतरा अभी भी बरकरार है।
इस बीच Donald Trump ने कहा है कि अमेरिका ईरान के यूरेनियम भंडार को पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इसे “न्यूक्लियर डस्ट” तक सीमित करने की बात कही है।
हालांकि, ईरान की ओर से हाल ही में एक प्रस्ताव भी सामने आया है, जिसमें यूरेनियम संवर्धन रोकने की बात कही गई है, लेकिन इस पर अब तक कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी है।
वहीं, दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय बढ़ता नजर आ रहा है। Strait of Hormuz में हालिया घटनाओं ने हालात और जटिल कर दिए हैं, जहां अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच टकराव की खबरें सामने आई हैं।
फिलहाल युद्धविराम लागू है, लेकिन हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा वैश्विक सुरक्षा और राजनीति के लिए बड़ा चुनौतीपूर्ण बन सकता है।
