जालौन मलंगा नाला पर छह माह पहले बना पुल क्षतिग्रस्त, दोनों ओर मिट्टी का कटाव बढ़ा; ग्रामीणों ने तकनीकी जांच और रिकवरी की उठाई मांग
रनवां से कोरीपुरा गांव के बीच आवागमन आसान बनाने के लिए मलंगा नाला पर करीब 26 लाख रुपये की लागत से बनाया गया रपटा पुल पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गया है। निर्माण के करीब छह माह बाद ही रपटा के कई हिस्सों में टूट-फूट दिखाई देने लगी है। पुल के दोनों ओर मिट्टी बहने से गहरे कटाव हो गए हैं, जबकि स्लैब भी क्षतिग्रस्त बताया जा रहा है।
करीब एक किलोमीटर की दूरी पर बसे रनवां और कोरीपुरा गांवों के बीच मलंगा नाला होने के कारण ग्रामीणों को लंबे समय से आवागमन में परेशानी होती थी। इसी समस्या के समाधान के लिए रनवां गांव के आगे बास मलंगा नाला पर रपटा पुल का निर्माण कराया गया था। ठेकेदार रजनीकांत कुशवाहा द्वारा करीब 26 लाख रुपये की लागत से कराए गए निर्माण से ग्रामीणों को स्थायी राहत की उम्मीद थी, लेकिन बारिश के बाद सामने आई स्थिति ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीण रामकरन प्रजापति, तीरथराम, पर्वत सिंह कुशवाहा, रहीश खान, कलू प्रजापति, मानसिंह कुशवाहा, बरनाम सिंह, राजा भइया, दशरथ कुशवाहा, आकाश, मुनेश, वीर प्रताप, रमाकांत और पप्पू प्रजापति आदि का आरोप है कि निर्माण के दौरान ही सामग्री और गुणवत्ता को लेकर आपत्तियां जताई गई थीं, लेकिन शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया।
बारिश के बाद पानी के बहाव से पुल के आसपास की मिट्टी बह गई और कई स्थानों पर गहरा कटाव हो गया। पुल के टूटे हिस्से अब इसकी मजबूती पर सवाल खड़े कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि पुल एक बारिश के बाद ही क्षतिग्रस्त हो रहा है तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष तकनीकी जांच जरूरी है।
ग्रामीणों ने डीएम समीर से मांग की है कि पुल में इस्तेमाल सामग्री, नींव, स्लैब और दोनों ओर की मिट्टी की भराई समेत पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए। यदि जांच में मानकों की अनदेखी या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार से रिकवरी कराकर पुल को मानकों के अनुरूप दुरुस्त कराया जाए। वहीं ठेकेदार रजनीकांत का कहना है कि जहां क्षति हुई है, वहां पानी कम होने के बाद मरम्मत करा दी जाएगी।
