Devkinandan Thakur Links LPG Crisis to ‘Satyug’ Return, Advocates Traditional Cooking
मथुरा: उत्तर प्रदेश के कई जिलों में एलपीजी गैस सिलेंडर की कमी की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। इस बीच ईरान से जुड़े तनाव के कारण गैस संकट और गहरा गया है। इस मुद्दे पर अब केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि धार्मिक वक्ताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।
प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने एक कथा के दौरान इस विषय पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिस तरह गैस सिलेंडर के लिए संघर्ष की स्थिति बनी हुई है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि अगर यही हाल रहा तो आने वाले कुछ वर्षों में लोग फिर से पुराने समय यानी ‘सतयुग’ जैसी जीवनशैली की ओर लौट सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि लोगों को दोबारा चूल्हे पर खाना बनाना पड़ सकता है।
कथा के दौरान महिलाओं को संबोधित करते हुए ठाकुर ने कहा कि चूल्हे पर बनी रोटी पहले के समय में अधिक बेहतर मानी जाती थी, हालांकि उसमें धुएं की समस्या जरूर थी। उन्होंने दावा किया कि गैस पर बनी रोटी से कई तरह की बीमारियां हो रही हैं और लोगों को इसकी जांच करानी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि गैस पर बने भोजन का असर पुरुषों की सेहत पर भी पड़ रहा है और आज के समय में पहले जैसी ताकत नहीं रही। उनके अनुसार, चूल्हे पर बनी रोटी में कोई दोष नहीं होता, जबकि गैस पर बनी रोटी में कुछ नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं।
इसके अलावा, ठाकुर ने वैश्विक स्थिति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्राकृतिक घटनाओं और संघर्षों के कारण भविष्य में गैस की उपलब्धता और प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि अगर गैस संसाधनों पर संकट बढ़ता है, तो लोगों को पारंपरिक ईंधनों जैसे लकड़ी और कंडों का सहारा लेना पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि लोग चूल्हे की ओर लौटते हैं, तो लकड़ी और गोबर के कंडों की मांग और कीमतें बढ़ सकती हैं। साथ ही, उन्होंने पशुपालन के महत्व की ओर भी इशारा किया।
