Athner Cleanliness Drive Under Scanner
मध्य प्रदेश: के Betul जिले की आठनेर नगर परिषद में स्वच्छता अभियान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बड़े पैमाने पर खर्च के बावजूद जमीनी स्तर पर साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब नजर आ रही है।
जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री Narendra Modi के स्वच्छता अभियान के तहत नगर में निरीक्षण टीम के आने की सूचना मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो गया। आनन-फानन में बस स्टैंड और कुछ चुनिंदा स्थानों पर रंग-रोगन कराया गया, डस्टबिन लगाए गए और दीवारों पर स्लोगन लिखवाए गए।
हालांकि, नगर के अधिकांश वार्डों में अब भी कचरे के ढेर लगे हुए हैं, जिससे साफ है कि स्वच्छता अभियान का असर पूरे क्षेत्र में नहीं दिख रहा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निरीक्षण टीम को केवल उन्हीं इलाकों में घुमाया गया, जहां पहले से साफ-सफाई कराई गई थी, जबकि वास्तविक स्थिति को छिपाया गया।
सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी Subhash Prajapati को अपने ही विभाग में कार्यरत स्वच्छता कर्मचारियों की संख्या की स्पष्ट जानकारी नहीं है। बताया जा रहा है कि परिषद में करीब 20 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिन पर हर साल 40 से 50 लाख रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं।
इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद शहर में स्वच्छता व्यवस्था संतोषजनक नहीं है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
यह मामला दर्शाता है कि स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण अभियान में योजनाओं और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच बड़ा अंतर मौजूद है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है और क्या जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होती है या नहीं।
