US Faces Setback on Iran Strike Plans as UK Refuses Use of Military Bases
लंदन: ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारियों के बीच अमेरिका को बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है। ब्रिटेन ने कथित तौर पर अमेरिकी सेना को ईरान पर किसी भी संभावित हमले के लिए अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की खबरें सामने आई हैं।
ब्रिटिश सैन्य ठिकानों के उपयोग पर रोक
‘द टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, पुराने रक्षा समझौतों के तहत अमेरिकी विमान ब्रिटेन के ग्लॉस्टरशायर स्थित RAF फेयरफोर्ड और हिंद महासागर के डिएगो गार्सिया बेस से तभी ऑपरेट कर सकते हैं, जब ब्रिटिश सरकार पहले से अनुमति दे। हालांकि ब्रिटेन ने ईरान के खिलाफ किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए ऐसी अनुमति देने से मना कर दिया है।
ब्रिटेन का कहना है कि स्पष्ट कानूनी आधार के बिना किसी हमले में शामिल होना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है।
ट्रंप ने ब्रिटेन के फैसले की आलोचना की
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन के इस फैसले पर नाराजगी जताई और सार्वजनिक रूप से इसकी आलोचना की। उन्होंने 2025 के उस समझौते पर भी सवाल उठाए, जिसके तहत ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र, जिसमें डिएगो गार्सिया और चागोस द्वीप शामिल हैं, की संप्रभुता मॉरिशस को सौंपे जाने का निर्णय लिया गया था।
चागोस द्वीप विवाद से बढ़ा तनाव
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा कि अमेरिका को “एक अस्थिर और खतरनाक सरकार के संभावित खतरे” से निपटने के लिए डिएगो गार्सिया और फेयरफोर्ड जैसे एयरफील्ड्स का इस्तेमाल जरूरी हो सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ब्रिटेन का समर्थन अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैध माना जा सकता है, क्योंकि ईरान से सहयोगी देशों को खतरा हो सकता है।
ईरान परमाणु कार्यक्रम पर भी चर्चा
यह विवाद उस समय सामने आया जब ट्रंप और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत हुई थी। इसके बाद अमेरिका और ब्रिटेन के बीच रणनीतिक मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम पश्चिमी सहयोगियों के बीच रक्षा और विदेश नीति को लेकर बढ़ती जटिलताओं को दर्शाता है।
