10-Year-Old Dispute Over Solid Waste Management Plant Erupts in Loni; FIR Against 150 People
गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र के मीरपुर हिंदू गांव में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को लेकर चल रहा करीब दस साल पुराना विवाद एक बार फिर उग्र हो गया है। रविवार देर रात पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के बाद किसानों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। वहीं प्लांट परिसर में घुसकर धरना देने के आरोप में करीब 150 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
आंदोलनकारी किसानों का आरोप है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण धरने पर बैठे महिलाओं और पुरुषों को जबरन हटाया। उनका कहना है कि पहले कुछ किसान नेताओं को थाने ले जाया गया और बाद में बाकी लोगों को डराया-धमकाया गया। किसानों के अनुसार, प्लांट की बिजली काट दी गई और गांव की ओर आने वाले रास्तों को भी बंद कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महिलाओं को जबरन उठाने की कोशिश की गई और उन पर लाठियां चलाई गईं।
किसान नेता चेतन त्यागी, मोनू त्यागी और रविंद्र नीरज गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि यदि प्लांट नहीं हटाया गया तो आंदोलन व्यापक जनआंदोलन का रूप ले लेगा। उनका कहना है कि अब वे गाजियाबाद जाकर नगर आयुक्त से मुलाकात नहीं करेंगे। यदि प्रशासन वार्ता चाहता है तो अधिकारियों को खुद लोनी आना होगा। डीसीपी के अनुरोध पर मंगलवार को नगर निगम अधिकारियों के साथ बातचीत प्रस्तावित थी, लेकिन 150 लोगों पर एफआईआर दर्ज होने की खबर के बाद आंदोलनकारियों में आक्रोश बढ़ गया।
भाकियू नेता चेतन त्यागी ने पुलिस प्रशासन पर दमनात्मक कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले यह आश्वासन दिया गया था कि प्लांट में निर्माण कार्य नहीं होगा, लेकिन बाद में वादा तोड़ दिया गया।
यह विवाद वर्ष 2015 से जुड़ा है, जब मीरपुर हिंदू गांव में डंपिंग ग्राउंड और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद काम आगे बढ़ाया गया और भरोसा दिलाया गया कि यहां केवल लोनी का कचरा ही प्रोसेस किया जाएगा। किसानों का आरोप है कि बाद में पूरे गाजियाबाद शहर का कूड़ा यहां लाया जाने लगा, जिससे प्रदूषण बढ़ा और गांव की आबोहवा व खेती पर नकारात्मक असर पड़ने लगा। करीब 83 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किए जा रहे इस प्लांट को लेकर ग्रामीणों में लंबे समय से नाराजगी बनी हुई है।
भारतीय किसान यूनियन समेत कई किसान संगठनों और राजनीतिक दलों ने आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की है। किसान नेताओं का कहना है कि वे अपनी जमीन, हवा, पानी और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष जारी रखेंगे।
