गाजियाबाद के मोदीनगर तहसील में प्रस्तावित 15 अक्टूबर से लागू होने वाली MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) व्यवस्था को लेकर व्यापारियों ने अपनी चिंता जाहिर की है। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल ने सरकार से इस व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग करते हुए प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है।
मोदीनगर व्यापार मंडल का कहना है कि छोटे और फुटकर व्यापारियों पर MDR का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। संगठन ने स्पष्ट किया कि वह डिजिटल भुगतान व्यवस्था का विरोध नहीं करता, बल्कि चाहता है कि UPI की मौजूदा सरल, सहज और शुल्क-मुक्त व्यवस्था पहले की तरह जारी रहे।
व्यापार मंडल ने अपने ज्ञापन में मांग की है कि MDR लागू करने से पहले छोटे और मध्यम व्यापारियों पर इसके आर्थिक प्रभाव का व्यापक अध्ययन कराया जाए। साथ ही केवल UPI से प्राप्त मासिक भुगतान के आधार पर सीमा तय करने के बजाय व्यापारी के वास्तविक कारोबार और व्यापार की प्रकृति को भी आधार बनाया जाए।
संगठन का कहना है कि यदि किसी श्रेणी में MDR लागू करना आवश्यक समझा जाता है, तो छोटे व्यापारियों को पर्याप्त राहत और व्यावहारिक संरक्षण दिया जाना चाहिए। व्यापारियों के अनुसार, डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लागू होने से इसका असर व्यापारियों और ग्राहकों दोनों पर पड़ सकता है तथा नकद लेन-देन को फिर बढ़ावा मिलने की आशंका है।
व्यापार मंडल ने यह भी मांग की है कि 15 अक्टूबर से प्रस्तावित व्यवस्था लागू करने से पहले देश के प्रमुख व्यापारी संगठनों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाए।
वहीं, मोदीनगर की एसडीएम कोमल पंवार ने बताया कि व्यापारियों की ओर से माननीय प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन प्राप्त कर लिया गया है, जिसे नियमानुसार अग्रेषित किया जाएगा।
स्थान: गाजियाबाद
