नई दिल्ली। UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए गए विदेशी दबाव के आरोपों को केंद्र सरकार ने खारिज कर दिया है। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि UPI से जुड़े सभी फैसले भारत सरकार स्वतंत्र रूप से लेती है और इनका किसी विदेशी दबाव से कोई संबंध नहीं है।
मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर जारी स्पष्टीकरण में कहा कि सरकार का उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था को अधिक आत्मनिर्भर, मजबूत और टिकाऊ बनाना है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि आम उपभोक्ताओं के लिए UPI भुगतान पहले की तरह निःशुल्क रहेगा।
किन लेनदेन पर नहीं लगेगा कोई शुल्क?
वित्त मंत्रालय के अनुसार, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (P2P) को UPI के माध्यम से पैसे भेजने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, चाहे लेनदेन की राशि कितनी भी हो।
इसी तरह, UPI QR कोड के माध्यम से हर महीने ₹1 लाख तक का कारोबार करने वाले छोटे व्यापारियों पर भी कोई MDR लागू नहीं होगा।
सरकार ने यह भी बताया कि देश में होने वाले 95 प्रतिशत से अधिक मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन ₹2,000 से कम के होते हैं और ये सभी पहले की तरह मुफ्त रहेंगे।
किन मामलों में लगेगा MDR?
सरकार के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर व्यापारियों को 0.4 प्रतिशत MDR देना होगा। मंत्रालय का कहना है कि यह शुल्क अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों की तुलना में काफी कम है।
इसके अलावा रेलवे, ईंधन, दूरसंचार, बिल भुगतान और बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं में ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर ₹5 का फ्लैट शुल्क निर्धारित किया गया है।
वहीं म्यूचुअल फंड और सिक्योरिटीज से जुड़े भुगतान पर 0.02 प्रतिशत शुल्क लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 तय की गई है।
ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त बोझ
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि व्यापारी MDR का खर्च ग्राहकों से नहीं वसूल सकते। साथ ही UPI ऐप्स को भी किसी प्रकार का अतिरिक्त प्लेटफॉर्म शुल्क लेने की अनुमति नहीं होगी।
UPI की उपलब्धि
सरकार ने कहा कि वर्ष 2016 में शुरू हुआ UPI आज दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम इंटरऑपरेबल डिजिटल पेमेंट सिस्टम बन चुका है। मंत्रालय के अनुसार, अगस्त 2026 में UPI के माध्यम से 24.5 अरब से अधिक लेनदेन दर्ज किए गए, जो इसकी व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है।
रिपोर्टर: अब्दुल खदीर
स्थान: हैदराबाद
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