आगरा। उत्तर प्रदेश में विकास को लेकर सरकार की ओर से लगातार बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन आगरा जिले के शमशाबाद रोड स्थित बरौली अहीर ब्लॉक का दिगनेर गांव इन दावों की हकीकत बयां करता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में पिछले 35 से 40 वर्षों से मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है। श्मशान घाटों की बदहाल स्थिति और जर्जर रास्तों के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बारिश में पन्नी के सहारे अंतिम संस्कार
ग्रामीणों के अनुसार गांव में कुल चार श्मशान घाट हैं, लेकिन इनमें से दो श्मशान घाट बेहद खराब हालत में हैं। यहां न तो अंतिम संस्कार के दौरान लोगों के बैठने या बारिश से बचने के लिए कोई शेड है और न ही सुरक्षा के लिए चारदीवारी बनाई गई है।
श्मशान घाट की करीब डेढ़ बीघा जमीन का बड़ा हिस्सा जलभराव के कारण तालाब का रूप ले चुका है, जबकि बाकी जमीन पर गोबर और गंदगी का अंबार लगा हुआ है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें परिजन बारिश के दौरान पन्नी (तिरपाल) लगाकर अंतिम संस्कार करते दिखाई दिए। जलभराव की वजह से शव यात्रा को खेतों के बीच बने रास्तों से निकालना पड़ा।
जर्जर रास्तों से बढ़ी मुश्किलें
गांव के मुख्य मार्ग भी पूरी तरह टूट चुके हैं और बरसात के मौसम में कीचड़ से भर जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन रास्तों से पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है, जबकि अंतिम संस्कार के लिए शव यात्रा निकालना बेहद जोखिम भरा साबित होता है।
चार दशकों से समाधान का इंतजार
ग्रामीणों का आरोप है कि श्मशान घाटों के विकास और रास्तों के निर्माण के लिए कई बार ग्राम प्रधान, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि वर्षों से सिर्फ आश्वासन ही मिलते रहे हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव के जर्जर रास्तों का शीघ्र निर्माण कराया जाए और श्मशान घाटों का कायाकल्प कर वहां आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि लोगों को अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील अवसर पर कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
