Six Questions by Congress on Epstein Row: Will Union Minister Hardeep Singh Puri Face Trouble?
नई दिल्ली। जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर सवाल उठाते हुए उन पर एपस्टीन के साथ संबंधों की प्रकृति स्पष्ट करने की मांग की है।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने छह तीखे सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पुरी ने एपस्टीन के अपराधों की गंभीरता को कमतर बताया। यह मामला तब गरमाया जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर जवाब देते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि वह आठ वर्षों में “पेशेवर क्षमता” में एपस्टीन से “तीन या चार बार” मिले थे। उन्होंने यह भी कहा कि तीन मिलियन ईमेल सार्वजनिक डोमेन में जारी हो चुके हैं।
2014 के कथित ईमेल का जिक्र
पवन खेड़ा ने 4 अक्टूबर 2014 के एक कथित ईमेल आदान-प्रदान का हवाला दिया, जिसे अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी दस्तावेजों का हिस्सा बताया जा रहा है।
खेड़ा के अनुसार, उस ईमेल में एपस्टीन ने पुरी से पूछा था, “क्या रीड से मुलाकात हुई?”
इस पर पुरी ने जवाब दिया था कि वह सैन फ्रांसिस्को में एक बैठक के लिए हैं और एपस्टीन को “दोस्त” कहकर सलाह मांगी थी। इसके जवाब में एपस्टीन ने कथित तौर पर सुझाव दिया कि रीड हॉफमैन की भारत यात्रा आयोजित करने की पेशकश की जाए, ताकि वे विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सोशल नेटवर्किंग से जुड़े लोगों से मिल सकें।
कांग्रेस के 6 सवाल
पवन खेड़ा ने निम्नलिखित सवाल उठाए:
- एपस्टीन को हरदीप पुरी और रीड हॉफमैन की संभावित मुलाकात की जानकारी पहले से कैसे थी?
- क्या एपस्टीन ही वह संपर्क सूत्र था जिसने यह मुलाकात करवाई?
- पुरी एपस्टीन के साथ मुलाकात से जुड़ी जानकारी क्यों साझा कर रहे थे?
- एपस्टीन को “दोस्त” क्यों कहा गया?
- एपस्टीन पुरी के लिए क्या भूमिका निभा रहा था?
- यदि संबंध केवल औपचारिक या सतही थे, तो पुरी उनसे सलाह क्यों मांग रहे थे?
खेड़ा का दावा है कि शुरुआती संपर्क, समन्वय और संवाद में एपस्टीन की भूमिका प्रमुख दिखती है।
क्या है ‘एपस्टीन फाइल’?
अमेरिकी न्याय विभाग ने दिवंगत यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े 30 लाख से अधिक अतिरिक्त पन्ने सार्वजनिक किए हैं। बताया गया है कि इन दस्तावेजों में हजारों वीडियो और लाखों तस्वीरें शामिल हैं। पहले जारी दस्तावेजों को मिलाकर कुल पन्नों की संख्या लगभग 35 लाख बताई जा रही है।
इन फाइलों में दुनिया के कई प्रभावशाली और धनी व्यक्तियों के नाम होने का दावा किया जाता रहा है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति की भूमिका या दोष सिद्धि का अंतिम निर्णय संबंधित जांच एजेंसियों और न्यायालयों पर निर्भर करता है।
फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है।
