सीतापुर। जनपद में नजूल भूमि से जुड़े पुराने पट्टों को लेकर प्रशासन ने महत्वपूर्ण कार्रवाई शुरू कर दी है। राजस्व ग्राम छावनी कदीम स्थित गाटा संख्या 343 की नजूल भूमि का रिकॉर्ड और पट्टों की वैधता की जांच की गई है। प्रशासन का कहना है कि कई पट्टों की अवधि वर्षों पहले समाप्त हो चुकी है और अब भूमि की वर्तमान स्थिति का परीक्षण किया जा रहा है।
जांच में सामने आया कि करीब 1.157 हेक्टेयर नजूल भूमि में कई भूखंड शामिल हैं। अभिलेखों के अनुसार इस भूमि पर पूर्व में विभिन्न व्यक्तियों को दिए गए पट्टों की अवधि समाप्त हो चुकी है। दस्तावेजों में 1913, 1936, 1951, 1957 और 1966 जैसी पट्टा समाप्ति तिथियों का उल्लेख भी किया गया है।
प्रशासनिक निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि गाटा संख्या 343 में से लगभग 0.646 हेक्टेयर भूमि खाली है, जबकि 0.511 हेक्टेयर भूमि पर निर्माण और अन्य उपयोग दर्ज है। इसके अलावा करीब 427.05 वर्ग मीटर भूमि को पूर्व के आदेश के आधार पर अलग से चिन्हित किया गया है।
प्रशासन अब सरकारी अनुदान अधिनियम, 1895 की धारा-3 के तहत नजूल भूमि के पुराने पट्टों की स्थिति का परीक्षण कर रहा है। प्रारंभिक प्रक्रिया के बाद इस भूमि को सरकारी उपयोग के लिए आरक्षित अथवा पुनर्गठित किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय प्रशासनिक आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। यह भी देखना होगा कि प्रस्तावित कार्रवाई का वर्तमान कब्जेदारों और पूर्व पट्टाधारकों पर क्या प्रभाव पड़ता है
रिपोर्ट: नन्द किशोर नाग
