झांसी गरौठा तहसील अंतर्गत हबूपुरा चंद्रपुर नुनार सिर्वो में लगी क्रेशर संचालक सुशील गुप्ता स्टोन कर रहे गिट्टी का मानक के विपरीत अवैध खनन
क्रेशर माफिया बेलगाम: NGT पर्यावरण व इंसान की जिंदगियां खतरे में मानक के विपरीत बड़े-बड़े गढ़ों में पहाड़ हो गए तब्दील पहाडों के नीचे इतने गहरे गड्ढे हो गए हैं कि उन में पानी निकाल आया है सृष्टि से छेड़छाड़ कर रहे क्रेशर संचालक आम जनमानस को बड़ा खतरा क्रेशर संचालक द्वारा नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां ब्लास्टिंग से आए दिन लोग घायल हो रहे तथा कई लोगों की जान जा चुकी है वहीं जीएसटी मैं भी चोरी की जा रही है ग्रामीणों की जिंदगी पर संकट में है।
गिट्टी से भरे बिना एम एम11 रह ओवरलोड ट्रक दौड़ रहे सड़कों पर जिसमें करोड़ों की लागत से बनाईगई सड़के हो रही नष्ट चेक पोस्टों पर नहीं रोके जाते गिट्टी से भरे ओवरलोड ट्रक व प्रपत्र चेक नहीं किए जाते चेक पोस्टों से अधिकारी रहते हैं नदारत
अब सवाल अवैध खनन तक सीमित नहीं अब सवाल हजारों जिन्दगी बचाने का है
झांसी जनपद के गरौठा तहसील क्षेत्र में अवैध खनन और सुशील स्टोन गुप्ता क्रेशर संचालकों की मनमानी अब खुलकर सामने आ रही है। नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे शुशील स्टोन, हरि लीला स्टोन, रामराजा स्टोन, महादेव स्टोन एवं ऋषभ स्टोन क्रेशर यूनिट्स न सिर्फ पर्यावरण को बर्बाद कर रहे हैं, बल्कि हजारों ग्रामीणों की जिंदगी भी खतरे में डाल रहे हैं।
आरोप है कि NGT के सख्त मानकों को लगातार दरकिनार किया जा रहा है। धूल और प्रदूषण के कारण करीब एक दर्जन गांवों में लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। खेतों की उर्वरा शक्ति खत्म होने की कगार पर है, जिससे किसानों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है। इतना ही नहीं, पेयजल संकट भी गहराता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में चल रहे स्टोन क्रेशरों की वजह से बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। “स्वस्थ भारत, शिक्षित भारत” का नारा यहां सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रहा है।
विधायक प्रतिनिधि ललित पटेल के अनुसार, गरौठा विधायक जवाहरलाल राजपूत के माध्यम से वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायत पहुंचाई गई थी। जिसके बाद भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग को कार्रवाई के आदेश भी दिए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर सिर्फ खानापूर्ति ही देखने को मिली।
स्थिति यह है कि प्रभावित ग्रामीण अब गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। लोगों का आरोप है कि खनन माफिया खुलेआम धमकी देते हैं कि उनका “सिस्टम ऊपर तक” है, जिससे उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है, या फिर माफियाओं के दबाव में काम कर रहा है? राजधानी लखनऊ तक शिकायतें पहुंचने के बावजूद कार्रवाई न होना, पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।
अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह पर्यावरणीय संकट आने वाले समय में और विकराल रूप ले सकता है, जिसकी कीमत आम जनता को अपनी सेहत और जिंदगी से चुकानी पड़ेगी। आइए हम दिखाने का प्रयास करते हैं
